सोमवार, 10 अगस्त 2015

बच्चों की बुनियाद पढ़ाई के साथ सैनिक शिक्षा पर रखी जाये आने वाले समय के लिये जरूरी!




हमने जब से होश संभाला तब से लेकर अबतक कम से कम चार युद्ध तो देखे हैं जो कभी पाकिस्तान से हुआ तो कभी चीन से, सन् 62 में जब चीन से युद्ध हुआ तो हमारी फौज इतनी शक्तिशाली नहीं थी लेकिन चीन युद्ध के बाद हमने अपनी शक्ति में भारी इजाफा किया. पाकिस्तान से युद्ध में पाक को अमरीका की भरपूर सहायता मिली, उसके बाद भी हमारी फौज ने जमकर उससे मुकाबला किया. अब जब देश को आजाद हुए करीब 68 साल होने को आये तब हमारी सैनिक शक्ति दुनिया की मजबूत और शक्तिशाली सेना के रूप में उभरकर आई है. इस मामले में हमने अमरीका को भी पछाड़ दिया है. आज के नौजवान हमसे सवाल करते हैं कि युद्ध नहीं होने की स्थिति में देश के सेना की क्या भूमिका है- हमारा उन्हें जवाब रहता है कि देश की सेना को हमेशा सक्रिय रहना चाहिये. सुस्त पड़़़़़ी रहे तो हम पर अगर दुश्मन हमला करें तो यह सुस्त सेना क्या करेगी? अत: हर दिन हमारी सेना एक नये रूप में उभरकर आती है जिसका उपयोग हम किसी भी पल कहीं भी कर सकते हैं. युद्ध नहीं तो सेना पर खर्च हमारी नौजवान पीढ़ी में से कई को अनावश्यक लगता है लेकिन वास्तविकता यह है कि सेना के लिये, सेना के ऊपर खर्च हर दिन जरूरी है, ताकि हम अपने संप्रभुता की रक्षा कर सकें. पहले सेना में महिलाओं की भर्ती बहुत कम होती थी लेकिन अब सेना में महिलाओं को भी लगभग समान रूप से रखा जाने लगा है. यह आवश्यक भी है, हाल ही बीएसएफ में कुछ ऐसी महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर निकली हैं जिन्होंने युद्ध में अपने पति को गंवा दिया. यह एक सराहनीय प्रयास है कि सीमा सुरक्षा बल ने उन परिवारों को मदद की जो देश के लिये मर मिटे. अक्सर यह शिकायत मिलती है कि सेना, बीएसएफ, पुलिस में शहीद के परिजन अपने भविष्य के प्रति चिंतित होकर भटकते रहते हैं. बच्चे
नौकरी के लिये तो परिजन मुआवजे व सहायता के लिये. सेना बीएसएफ व अन्य सशस्त्र बलों में भर्ती के बाद यह जरूरी है कि संबंधित बल उनके परिजनों के लिये यह सुनिििश्चत करें कि उन्हें सैनिक के शहीद होने के बाद उनके परिवार के सदस्य को या तो उसके स्थान पर नौकरी पर लगाया जायेगा या फिर ऐसी कोई अन्य सुविधा दी जायेगी जिससे उनके भविष्य पर किसी प्रकार की आंच आयेगी. सेना के प्रति लोगों का आकर्षण होना जरूरी है. आज के युवाओं में बहुत से जानते भी नहीं कि सेना आखिर है क्या? इसके लिये यह जरूरी है कि स्कूलों से ही बुनियादी तौर पर सेना के प्रति रूझान बढ़ाया जाये, प्राथमिक शिक्षा के बाद एनसीसी को अनिवार्य किया जाये ताकि इसके जरिये बच्चे सेना की पूरी जानकारी प्राप्त कर सके. वर्तमान परिस्थितियों में यह जरूरी है कि बच्चों को शुरू से इस लायक बनाया जाये कि वह देश के लिये कुछ कर सकें.
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