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व्यापम से भी बड़ा रहस्य अब इसमें आरोपियों, गवाहों की मौत, संदिग्ध मौतों के पीछे आखिर कौन?




हम तंत्र-मंत्र पर विश्वास नहीं करते, इसमें कोई शक्ति है या नहीं यह भी हमें नहीं मालूम क्योंकि विश्व को ईश्वर नामक शक्ति ने बनाया है, उससे बड़ी कोई शक्ति नहीं है. मेरा संपर्क एक वरिष्ठ तांत्रिक से हुआ था जिसने मुझे एक खास बात बताई कि तंत्र विद्या दो तरह की होती है, इसे बड़ी मुश्कि ल से प्राप्त किया जाता है, एक होती है 'पाकÓ और दूसरी 'नापाकÓ. उन्होंने कहा हम तो पाक करते हैं लेकिन जो लोग नापाक करते हैं वह इतने खतरनाक होते हैं कि मुम्बई में बैठकर रायपुर या दुनिया के किसी कोने में किसी को भी मार सकते हैं और लोग कहेंंगे कि उनकी मौत स्वाभाविक हार्ट अटैक से, दुर्घटना अथवा बीमारी से हुई या फिर लीवर फेल हो गया या और कुछ और. आज यह संदर्भ इसलिये भी निकला कि मध्यप्रदेश के देशव्यापी व्यापम घोटाले में कम से कम संदिग्ध पैतालीस मौतों ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर यह मौतें कैसे और क्यों हो रही है. इस पूरे प्रकरण में अधिकांश लोग युवा हैं जिनकी मौत पर कोई भरोसा भी नहीं कर सकता, आखिर यह कौन सी शक्ति है या कौन-सा प्रयोग है जो इस घोटाले  में लिप्त या गवाही देने वाले अथवा मध्यस्थ को एक-एक कर मारे जा रहा है? बहरहाल अब शिवराज सिंह ने फैसला कर लिया है कि इन मौतों के मामले पर सीबीआई जांच कराई जाये. व्यापम घोटाले की ताजातरीन घटना एक और संदिग्ध मौत है, व्यापम के जरिये भर्ती हुई ट्रेनी एसआई अनामिका कुशवाहा ने आज तालाब में कूदकर  आत्महत्या कर ली. चौबीस घंटे के अंदर तीसरी मौत ने इस मामले से जुड़े मृतकों की संख्या 44-45 के आसपास कर दी है. शनिवार  और रविवार को दो लोगों की मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में हुई  जिनमें जबलपुर मेडिकल कालेज के डीन दिल्ली के एक होटल में मृत पाये गये जबकि आज तक चैनल के खोजी पत्रकार अक्षय सिंह भी इस मामले की और खोज करते-करते एक अन्य मृतका के घर पर ही संदिग्ध परिस्थितियों में मारे गये. डीन डा. शर्मा ने कुछ दिन पहले ही एसटीएफ को व्यापम घोटाले के बारे में दो सौ से ज्यादा जानकारियां सांैपी थी. मध्यप्रदेश प्रोफेशनल एक्सामिनेशन बोर्ड उर्फ मध्यप्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल उर्फ व्यापम में भारी अनियमितता की शिकायत सन् 2004 में सामने आई थी इसमें बड़े-बड़े अधिकारी नेताओं के शामिल होने का आरोप लगा, सरकार द्वारा बिठाई गई एसआईटी की जांच के बाद कई बड़े राजनीतिज्ञ नेता और अधिकारी चपेट में आये. मध्यप्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री तक इसकी आंच लगी. 2015 तक इस पूरे मामले में दो हजार से ज्यादा लोग गिरफ्तार किये गये. जांच के दौरान कई लोगों की मौत हुई जिसमें 25-26 के करीब लोगों की मौत तो प्राकृंितक न होकर एकदम संदिग्ध मानी गई जिसके बारे में खोजबीन में कोई तथ्य सामने नहीं आया. मौतों का सिलसिला 2009 को उस समय शुरू हुआ जब इस कांड से जुड़े एक मध्यस्थ विकास सिंह की दवा केे एडवर्स रियेक्शन से मौत हो गई फिर 2010 को एक अन्य मध्यस्थ श्यामवीर यादव की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. अंशुल सचिन, अनुज उके, ज्ञान सिंह, दीपक वर्मा सभी मध्यस्थ की मृत्यु 2010 में हुई. 2012 में नम्रता दामोर, आदित्य चौधरी, अनंतराम, अरविन्द साख्या, रिकंू, कांस्टेबल प्रमोद शर्मा की मौत हुई जबकि 2013 में कुलदीप मरावी, प्रेमलता पाण्डे, आशुतोष तिवारी, तरूण मच्चर, आनंद सिंह यादव, देवेन्द्र नागर की मौत हुई. इसी प्रकार 2014 में भी बंटी सिकरवार नामक मध्यस्थ ने भी आत्महत्या कर ली. 2015 शुरू होते ही मौत का सिलसिला जारी है, जनवरी में एक छात्र ललित गोलारिया का शव मुरेैना में पुल के नीचे मिला. जनवरी में ही छात्र रामेन्द्र सिंह भदोरिया भी मारा गया, अमित सागर, शैलेष यादव, विजय सिंह पटेल, नरेन्द्र सिंह तोमर, राजेन्द्र आर्या, अक्षय सिंह, अरूण कुमार ऐसे कितने ही नाम हंै जो इस घोटाले की एसआईटी पूछताछ के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई. अभी जांच खत्म नहीं हुई हैै. इस पूरे मामले में किसी न किसी रूप से लिप्त लोगों में भय छाया हुआ है कि उनकी मौत कब हो जाये. कुछ ने तो अपनी जान का खतरा बताकर सुरक्षा की मांग भी की है. यह मौतें प्राकृतिक है या सुनियोजित कोई नहीं जानता किन्तु आगे आने वाले समय में जब पूर्ण खुलासा होगा तो सभी को चौंका सकता है.

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