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याकूब फांसी पर!इधर आतंक के खेल की आहट...

याकूब फांसी पर! इधर आंतक
के नये खेल की आहट और
आंतकियों के पास अमरीकी डिवाइस!
दो चर्चित लोगों को आज सुपुर्दे खाक किया गया. एक देश की महान हस्ती, भारत के पूर्व राष्ट्रपति मिसाइलमेन अबुल पकीर अब्दीन अब्दुल कलाम जिनका शिमला में निधन हो गया था और दूसरा मुम्बई में सीरियल ब्लास्ट के लिये जिम्मेदार याकूब मेमन जिसे सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी. याकूब मूमन का आज जन्मदिन भी था -एक का नाम विश्व के प्रसिद्ध व्यक्तियों की श्रेणी में रखा जायेगा और दूसरा मुम्बई में कई लोगों की मौत के लिये जिम्मेदार!
बहरहाल इस बीच एक बड़ी खबर चौंका देने वाली है कि आईएसआईएस नामक आतंकवादी संगठन हमारे देश पर हमले की योजना बना रहा है. दूसरा बड़ा रहस्योद्घाटन यह कि जम्मू से सटे पंजाब के गुरदासपुर में सोमवार को हुए आंतकी हमले में एक  आतंकियों के रूट से मिले नाइट विजन डिवाइस में अमरीकी मार्का लगा हुआ है- अब यह जांच का विषय है कि आखिर आतंकवादियों के हाथ यह डिवाइस कैसे लगा? जीपीएस रूट से इस बात का तो खुलासा हुआ है कि इस मामले में लिप्त लोग पाकिस्तान से आये थे और तीनों मुस्लिम थे, इस बात की पुष्टि भी कर दी गई है. पहले यह संदेह व्यक्त किया गया था कि यह खालिस्तान समर्थक भी हो सकते हैं. नाइट डिवाइस अमरीकी सेना करती है किन्तु यह आंतकवादियों के पास कैसे आया? क्या उसे यह अफगानिस्तान में तालीबान आंतकियों द्वारा लूट के मामले से हिस्से में मिला है या फिर पाक को अमरीका से मिले हथियारों में से इस हमले के लिये पाक आर्मी द्वारा भेंट किया हिस्सा है? पाक वैसे भी मुंह में राम बगल में छुरी वाली कहावत पर चल रहा है. अमरीका स्वयं भी दोहरा चरित्र लेकर चलता है, उसी ने अपने देश में हमला करने वाले ओसामा बिन लादेन को तैयार किया था जो उसी के लिये खतरा बन गया. इन सबमें गंभीर मसला अब आईएसआईएस की योजना को नेस्तनाबूत करना है. हमारी सीमा को और मजबूत करने की जरूरत है, वहीं आंतरिक सुरक्षा को भी और पुख्ता करना होगा. इधर याकूब मेमन को फांसी के बाद मुम्बई हमलों के अन्य दोषी फरार लोगों की क्या प्रतिक्रिया होगी इस पर भी कड़ी निगाह रखने की जरूरत है. मुम्बई बम ब्लास्ट के प्रमुख आरोपी दाउद इब्राहिम व उसके कई अन्य साथियों का अब तक पता नहीं जबकि मुम्बई ब्लास्ट मामले में सारे आरोपी जब तक पकड़े नहीं जायेंगे तब तक इस कांड के पीडि़तों को न्याय नहीं मिलेगा.

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उम्र कैद की सजा पर से संदेह खत्म! क्या फांसी की सजा पर भी सुको सज्ञान लेगी?

याकूब मेनन को फांसी  से पहले व बाद से यह बहस का विषय है कि फांसी दी जानी चाहिये या नहीं अभी भी इसपर बहस जारी है लेकिन इस बीच उम्र कैद का मामला भी सुर्खियों में है कि आखिर उम्र कैद होती है, तो कितने साल की? यह माना जाता रहा है कि उम्र कैद का मतलब है- चौदह साल जेल लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि उम्र कैद चौदह साल नहीं बल्कि ताउम्र है याने अपराधी की जब तक जिंदगी है तब तक उसे जेल में ही काटनी होगी. छत्तीसगढ के धीरज कुमार, शैलेन्द्र और तीन दोषियों के मामले में याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और वी गोपाला गोवड़ा की बेंच ने समाज के एक वर्ग द्वारा फांसी की सजा के विरूद्व अभियान पर टिप्पणी करते हुए कहा की यह वर्ग चाहता है कि फांसी को खत्म कर उसकी जगह आजीवन कारावास की सजा दी जाये तथा स्पष्ट किया कि उम्र कैद का मतलब उम्र कैद होता है न कि चौदह साल. अपराधी जिसे उम्र कैद हुई है उसे अपनी पूरी उम्र सलाखों के पीछे बितानी होगी. इससे यह तो संकेत मिलता है कि भविष्य में फांसी को खत्म करने पर भी विचार किया जा सकता है. सर्वोच्च अदालत ने अब तक उम्र कैद के संबन्ध में चली…

काले धूल के राक्षसों का उत्पात...क्यों खामोश है प्रशासन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के औद्योगिक क्षेत्रों-उरला, सिलतरा, सोनढोंगरी,भनपुरी से निकलने वाली काली रासायनिक धूल ने पूरे शहर को अपनी जकड़  में ले लिया है .यह धूल आस्ट्रेलिया के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाली धूल से 18 हजार गुना ज्यादा है.
यहां करीब तीन दर्जन उद्योग ऐसे हैं जो चौबीसों घंटे धूल भरी आंधी उगल रहे हैंं ,जिसपर किसी का कोई नियंत्रण नहीं ह्रै. नियंत्रण है तो भी वह कुछ दिनों में छूटकर आसमान और धरती दोनों पर कब्जा कर लेते हैं.
चौकाने वाली बात यह है कि वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है. यह संख्या चीन से ज्यादा है.प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण से जहां 1640 लोगों की मौत के मुकाबले चीन में वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या (1620 ) ज्यादा है. यह आंकड़े हम यहां इसलिये पेश कर रहे हैं ताकि रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये इसपर नियंत्रण पाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये. वायूु प्रदूषण के बगैर स्मार्ट सिटी,डिजिटल सिटी बनाने का सपना पूरा हो पाना कठिन है. आज स्थिति यह है कि एक स्थान पर कालेधूल को हटाया जाता है तो शहर का दूसरा भाग कालिख पुतवा लेत…

ऊची दुकान फीके पकवान!

रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर 2010

ऊँची दुकान फीके पक वान!
कभी बच्चो को परोसे जाने वाला मध्यान्ह भोजन तो कभी होटल, रेस्टोरेंट से खरीदी गई खाने की सामग्री तो कभी किसी समारोह में वितरित होने वाले भोजन के जहरीले होने और उसको खाने से लोगों के बीमार पडऩे की बात आम हो गई हैं। अभी बीते सप्ताह शनिवार को नई राजधानी में सड़क निर्माण कंपनी के मेस का खाना खाकर कई मजदूर बीमार हो गये। कइयों की हालत गंभीर थी। मेस को हैदराबाद की बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी चला रही थी। सबसे पहला सवाल यह उठता है कि जब कोई कंपनी या समारोह में इतने व्यक्तियों का खाना एक साथ पकता है उसे लोगों में बांटने के पहले जांच क्यों नहीं होती? खाना बनाने से पहले यह क्यों नहीं देखा जाता कि जहां खाना बनाया जा रहा है वहां का वातावरण पूर्ण साफ सुथरा है या नहीं। स्कूलों में बच्चों को वितरित होने वाले मध्यान्ह भोजन में भी कुछ इसी तरह का होता आ रहा है। बच्चो को जो खाना बनाने के लिये कच्चा माल पहुँचता है उसका उपयोग करने से पहले उसकी सही जांच पड़ताल नहीं होती फलत: उसमें कीड़े मकोड़े व अन्य जीव जन्तु भी मिल जाते हैं। अक्सर समारोह व शादी …