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व्यवस्था के दो रूप-एक माननीय ने जीवित पूर्व राष्ट्रपति के चित्र पर फूल चढ़ाया, दूसरे ने मान बढ़ाया!


व्यवस्था के दो रूप-एक माननीय ने
जीवित पूर्व राष्ट्रपति के चित्र
पर फूल चढ़ाया, दूसरे ने मान बढ़ाया!
झारखंड की शिक्षामंत्री ने बुधवार को एक स्कूल के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के चित्र पर माल्यार्पण किया, फूल चढ़ाये और जीते जी उन्हें श्रद्धांजलि भी दे डाली. यह सब देखने के लिये स्कूली बच्चे, शिक्षक और झारखंड के अधिकारी मौजूद थे, किसी ने यह नहीं कहा कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिये. चूंकि कलाम अभी जीवित हैं. झारखंड में यह पहला अवसर नहीं है जब मंत्रियों के व्यवहार की इतनी छीछालदर हुई है. दूसरी ओर सांसद शशि थरूर का उदाहरण है, जिन्होंने ब्रिटेन जाकर उसके देश में वहां की सरकार को ललकारा कि ब्रिटिश शासनकाल में उसने हमारे देश को लूटा है, उसका मुआवजा उसे मिलना चाहिये. यह दो उदाहरण है जो प्रजातांत्रिक व्यवस्था को तुला पर तौल रही है-एक का वजन ज्यादा है तो दूसरे का कम! यह हमारी ही गलती है कि हम ऐसे कतिपय लोगों को चुनकर सत्ता में भेजते हैं जो न केवल अशिक्षित हैं बल्कि अज्ञानता की भी हद पार कर देते हैं,-जबकि देश में संविधान के तहत निर्मित एक संस्था है 'चुनाव आयोग, जिसे चुनाव नियमों में अपार परिवर्तन का अधिकार है किन्तु दुख इस बात का है कि चुनाव में मौजूद खामियों को यह संस्था आजादी के अड़सठ वर्षों बाद भी दूर नहीं कर सकी. अड़सठ साल पीछे मुड़कर देखें तो उस समय देश गरीब था, अशिक्षित था, कई बातों से अनजान था लेकिन अब तो यह स्थिति नहीं रही- कुछ चंद प्रतिशत को छोड़कर लोग पढ़े लिखे हैं, समृद्ध हैं और जानकार भी! फिर चुनाव आयोग निर्वाचन की प्रक्रिया में समय के अनुसार फेरबदल क्यों नहीं करता? हम मानते हैं कि जिम्मेदार मंत्री पद पर किसी की नियुक्ति मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री अपनी पसंद से करते हैं लेकिन वहां उन तक पहुंचाने के लिये जो अर्हताएं होती है उसका चयन चुनाव आयोग को ही करना होता है मसलन उसकी आयु कितनी है? मंद बुद्धि का तो नहीं है? कोई कितना पढ़ा-लिखा होना चाहिये, वह आपराधिक प्रवृति का तो नहीं है- उसक ा चरित्र कैसा होना चाहिये यह सब तो चुनाव से पूूर्व किसी प्रत्याशी को सार्टिफिकेट देने से पहले ही तय होना चाहिये लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया के तहत जो पहले से चला आ रहा है वही ढर्रा चल रहा है, उसी का नतीजा है कि आज देश में कहीं आपराधिक प्रवृति का कोई व्यक्ति मंत्री पद ग्रहण कर जाता हैं तो कोई फर्जी डिग्री लेकर पूरे समाज को ज्ञान बांटने लगता है. चुनाव प्रक्रिया में भारी बदलाव की जरूरत है-जो व्यक्ति चुनाव में उतरता है उस पर चुनाव आयोग की नजर उसकी शैक्षणिक योग्यता, उसका चरित्र, आपराधिक इतिहास व अन्य कई महत्वपूर्ण जानकारियों से भरा होना चाहिये. देश में इस समय होने वाली बहुत सी घटनाएं कतिपय माननीयों की जुबान और उनकी अज्ञानता, अशिक्षा के कारण हो रही है, इसपर नियंत्रण के लिये कोई न कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाना जरूरी है. अभी तो सिर्फ देश के अंदर ही ऐसे माहौल का सामना करना पड़ रहा है, आगे भी कोई परिवर्तन नही हुआ तो विदेशों में भी हम ऐसेे लोगो के कारण हंसी के पात्र बनेंगे.

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रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर 2010

ऊँची दुकान फीके पक वान!
कभी बच्चो को परोसे जाने वाला मध्यान्ह भोजन तो कभी होटल, रेस्टोरेंट से खरीदी गई खाने की सामग्री तो कभी किसी समारोह में वितरित होने वाले भोजन के जहरीले होने और उसको खाने से लोगों के बीमार पडऩे की बात आम हो गई हैं। अभी बीते सप्ताह शनिवार को नई राजधानी में सड़क निर्माण कंपनी के मेस का खाना खाकर कई मजदूर बीमार हो गये। कइयों की हालत गंभीर थी। मेस को हैदराबाद की बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी चला रही थी। सबसे पहला सवाल यह उठता है कि जब कोई कंपनी या समारोह में इतने व्यक्तियों का खाना एक साथ पकता है उसे लोगों में बांटने के पहले जांच क्यों नहीं होती? खाना बनाने से पहले यह क्यों नहीं देखा जाता कि जहां खाना बनाया जा रहा है वहां का वातावरण पूर्ण साफ सुथरा है या नहीं। स्कूलों में बच्चों को वितरित होने वाले मध्यान्ह भोजन में भी कुछ इसी तरह का होता आ रहा है। बच्चो को जो खाना बनाने के लिये कच्चा माल पहुँचता है उसका उपयोग करने से पहले उसकी सही जांच पड़ताल नहीं होती फलत: उसमें कीड़े मकोड़े व अन्य जीव जन्तु भी मिल जाते हैं। अक्सर समारोह व शादी …