डिजिटल इंडिया की एंट्री, आम लोगों तक पहुंचाने में कई पापड़ बेलने पड़ेंगे



एक समय जब पुलिस वाले वायरलेस हाथ में लेकर एक दूसरे से बात करते थे तो हमें भी लालच होता था कि काश हमारे पास भी ऐसा कुछ होता तो हमारे काम कितने आसान हो जाते, धीरे से समय ने हमारी इच्छा को पूरा किया. सामाजिक क्षेत्र में पेजर की एंट्री हुई और यह कुछ ही समय में लोगों के रेस्ट में टंगा और कैसेे लुप्त हो गया पता ही नहीं चला. मोबाइल की एंट्री ने सभी संचार माध्यमों को पीछे छोड़ दिया. मोबाइल मंहगें थे, कम लोगों के पास थे लेकिन लोग मजाक में यह भी कहा करते थे कि एक समय ऐसा आयेगा जब रद्दी बेचने वाला भी दस मंजिले मकान के नीचे खड़े होकर फोन कर गृह स्वामी से पूछेगा कि बाई रद्दी है क्या? और घर में काम करने वाली बाई मोबाइल से फोन कर कहेगी कि बाई आज काम पर नहीं आऊंगी. युग बदला और वह सब कुछ हो गया जो पिछली शताब्दी में लोग सपने में देखते और दिन में कल्पना करते थे. बीसवीं सदी में युग ऐसा बदला कि आज हम कम्पयूटराइज्ड और डिजिटिल हो गये. पूरी दुनिया हमारी उंगली पर नाचने लगी. घर बैठे आप बिजली का बिल भर सकते हैं, टेलीफोन का किराया अदा कर सकते हैं. डिश टीवी का पेमेंट कर सकते हैं. नौकरी पर लगने के लिये चक्कर लगाने की भी जरूरत नहीं-घर बैठे ही वेबसाइट पर आप अपने लिये नौकरी खोज सकते हैं और भी बहुत कुछ. भारत डिजिटल में आगे बढ़ने बेताब है,  इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को डिजिटल इंडिया के एक बड़े कार्यक्रम का ऐलान किया. इस योजना में जहां अरबों रुपये का निवेश होगा वहीं कई युुवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, बशर्ते योजना ईमानदारी से लागू हो. योजना के मुताबिक इंटरनेट और वाई-फाई सेवा को जन-जन तक पहुंचाना है. आज की स्थिति में वैसे भी करोड़ों लोग मोबाइल का उपयोग करते हैं, इसमें गरीब-अमीर सभी हैं लेकिन इसका उपयोग वैसे नहीं हो पाता जैसे बड़ा और उच्च वर्ग करता है. इंटरनेट से बैंकिंग सुविधा और अन्य ऐसी ही सुविधाएं आज भी कई लोग नहीं कर पाते. जब हम किसी तकनीक को फैलाने का प्रयास करते हैं तो उसके लिये लोगों को प्रशिक्षित भी करना पड़ता है. प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में शामिल करने के लिये किसान, मजदूर सभी वर्ग के लोग शामिल हैं. जन-जन तक पहुंचाने की योजना को लागू करने में वक्त लगेगा, नई पीढ़ी जो डिजिटल इंडिया में ही पैदा हुए उनके लिये तो यह आसान होगा लेकिन प्रश्न उन लोगों के लिये है जो न कम्पयूटर का ए बी सी डी जानते हैं और न मोबाइल को आन, डायल और रिसीव करना जानते हैं. ऐसे लोगों तक आप इंटरनेट व वाई-फाई पहुंचा भी दोगे तो यह किस काम का. अत: एक जागरूकता का अभियान भी सरकार को साथ-साथ चलाना पड़ेगा जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें इसके लिये यह भी जरूरी है कि प्राय: हर स्कूल कॉलेज में कम्पयूटर शिक्षा को अनिवार्य बनाया जाये तथा मोबाइल को इंटरनेट सुविधा से ऑपरेट
करने का तरीका समझाया जाये. डिजिटल इंडिया में प्रधानमंत्री ने देश के कोन-कोने तक यहां तक कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी इंटरनेट, वाई-फाई और मोबाइल सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही है लेकिन क्या हमारे देश की जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग इसके लिये तैयार है? जहां तक हर काम को इंटरनेट और वाई-फाई से जोड़कर ई-वर्किंग का सवाल है, यह पूर्णत: उपयोगी साबित हो सकता है लेकिन सारी योजना का क्रियान्वयन के लिये बहुत अधिक मेहनत करनी पड़ेगी.

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