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मैगी से ज्यादा खतरनाक है शराब, पूरे देश में प्रतिबंध हो!



मैगी पर पूरे देश भर में बैन लगा दिया- अच्छा किया, चूंकि  सरकार के अनुसार इसमें लेड की मात्रा ज्यादा पाई गई. देश में जगह-जगह छापेमारी की कार्यवाही हो रही है और मैगी को उसके बिल से खोज-खोजकर बाहर निकाला जा रहा है. निकाला भी जाना चाहिये, चूंकि यह मनुष्य के स्वास्थ्य के लिये बहुत ही खतरनाक है. ज्यादा लेड मैगी के साथ शरीर के अंदर पहुंच गया तो यह इंसान का बेड़ा गर्क कर देगा. सरकार ने जनता के हित में यह कदम उठाया है, हम इसकी तारीफ करते हैं इसके साथ ही एक सवाल सरकार से करना चाहते हैं कि मैगी पर जिस तरह कार्रवाई की गई ठीक उसी तरह शराब, स्प्रिट, तम्बाकू, गुटखा और अन्य ऐसे ही मादक पदार्थों पर क्यों नहीं की जा रही? शराब पीना स्वास्थ्य के लिये घातक है यह जानते हुए भी उसपर क्यों नहीं प्रतिबंध लगाया जा रहा! चाहे देशी हो या विदेशी दोनों शराब में अल्कोहल की मात्रा इतनी ज्यादा होती है कि किसी के भी लीवर को हानि पहुंचा सकती है और उसे मौत के घाट उतार सकती है. मैगी और शराब दोनों में इस समय कोई अंतर नजर नहीं आ रहा. इतने सालों से लोग मैगी का उपयोग करते आ रहे हैं किसी को उससे तकलीफ नहीं हुई लेकिन शराब पीकर तो कई लोग मर चुके हैं, अचानक लेड की मात्रा मैगी में कहां से घुस गई? जबकि शराब के बारे में तो पूरी दुनिया जानती है कि उसे पीने से आदमी का लीवर नष्ट हो जाता है. भारत जैसे गरीब राष्ट्र में तो मैगी से कई गुना ज्यादा खतरनाक शराब-तम्बाकू है जिसे पीने और खाने से लोग लीवर और कैंसर की बीमारी से ग्रसित हो सकते हैं. शराब कई घरों को बरबाद कर रही है. सरकार जनता की हितचिंतक है इसमें दो मत नहीं उसे मैगी के साथ शराब पर भी पूरे देश में बैन कर देना चाहिये यह समय की मांग है. मैगी में लेड है तो शराब में अलकोहल तो तम्बाकू, सिगरेट में निकोटिन जैसे घातक रासायनिक पदार्थ मिले होते हैं तब तो यह जरूरी हो जाता है कि पूरे देश में मैगी के साथ इस समाज विरोधी व समाज के लिये घातक द्रव्य पर भी तुरन्त बैन लगाई जाये. मैगी के अलावा भी बहुत से ऐसी वस्तुएं बाजार में मौजूद है जो इंसान के शरीर के लिये घातक है. सरकार को चाहिये कि बाजार में मौजूद हर ऐसे पदार्थ की जांच कराये जो मनुष्य के स्वास्थ्य के लिये घातक है. इसमें मिलावटी दूध, खोवा, घी व अन्य ऐसे पदार्थ भी शामिल है. दूध में तो सोडा जैसे धातक पदार्थ का उपयोग किया जाता है इसलिये पूरे देश में दूध पीने व बेचने पर भी प्रतिबंध जरूरी हो जाता है. बाजार में मौजूद हर वस्तुओं और पदार्थों को लोग अब शक के नजरिये से देख रहे हैं ऐसे में यह जरूरी है कि आम लोगों में व्याप्त भ्रांति को तत्काल दूर किया जाये.

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चौकाने वाली बात यह है कि वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है. यह संख्या चीन से ज्यादा है.प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण से जहां 1640 लोगों की मौत के मुकाबले चीन में वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या (1620 ) ज्यादा है. यह आंकड़े हम यहां इसलिये पेश कर रहे हैं ताकि रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये इसपर नियंत्रण पाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये. वायूु प्रदूषण के बगैर स्मार्ट सिटी,डिजिटल सिटी बनाने का सपना पूरा हो पाना कठिन है. आज स्थिति यह है कि एक स्थान पर कालेधूल को हटाया जाता है तो शहर का दूसरा भाग कालिख पुतवा लेत…

ऊची दुकान फीके पकवान!

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ऊँची दुकान फीके पक वान!
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