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नान घोटाला कांड के जाल में फंसी बड़ी मछलियां फिसल गई या फिसलाकर बाहर कर दिया?



यूं ही एसीबी  एंटी करप्शन ब्यूरो या आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरों के कार्यो पर किसी का विश्वास नहीं रहा अब जब उसने विश्वास जीतने के लिये एक बड़ा मामला अदालत में सौपने की कोशिश की तो उसमें भी सरकार चट्टान बनकर सामने हैं. नान घोटाला छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में मध्यप्रदेश के व्यापम घोटाले की तरह चर्चा में रहा है. नान घोटाले में लिप्त सत्रह आरोपियों के खिलाफ तो छत्तीसगढ़ शासन ने अभियोग पत्र पेश करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी लेकिन इस करोड़ों  रूपये के घोटाले में लिप्त दो प्रमुख कड़ियों को यह कहते हुए अलग कर दिया कि तकनीकी कारणवश उनपर कार्रवाई की अभी अनुमति नहीं दी जा सकती. सरकार  को आम लोगों के समक्ष यह स्पष्ट करना चाहिये कि इन आईएएस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने  में ऐसे कौन से तकनीकी कारण है जिसके चलते उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है. जब देश के प्रधानमंत्री को कटघरे में लाया जा सकता है तो यह कौन से तीस मारखां हैं जिन्हें बख्शने का प्रयास किया जा रहा है? क्यों नहीं और  लोगों के साथ  इन लोगों का चालान भी अदालत मेें पेश नहीं किया जाता ताकि दूध का दूध और पानी का पानी ह हो जाय तथा सरकार  अपने पर लगने वाले  दाग से भी बच सकें .मध्यप्रदेश के व्यापम घोटाले  में भी  कम से कम दो नामी आईएएस अफसरों का नाम आया था जिनके खिलाफ कार्रवाही करने में वहां की सरकार नहीं हिचकी फिर छत्तीसगढ़ में ऐसा कौनसा तकनीकी कारण इन बड़े अफसरों पर कार्रवाही करने से रोक रहा है? एसीबी या आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो अब तक कोर्ट में चालान पेश करने व अपराधियों पर कार्रवाही करने के नाम पर बदनाम रहा है कि वह अपराध दर्ज करने के बाद काफी विलंब करता है तथा मामला आगे चलकर रफा दफा हो जाता है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. जनता का पैसा डकारने वालों पर सख्त कार्रवाही के रूप में अभियोग पत्र अदालत में पेश करने की अनुमति मांगी गई जिसमेें यह दो बड़े अफसर भी  थे किन्तु इनपर कार्रवाई न करने देकर यह स्पष्ट हो रहा है कि किसी न किसी को बचाने के लिये यह सब किया जा रहा है.नागरिक आपूर्ति निगम 'नानÓ के मुख्यालय सहित अटठाईस ठिकानों पर एनटी करप्शन ब्यूरो ने छापा मारा था तथा पता लगाया था कि कैसे कैसे घोटाला किया गया.प्रबंधक के पास से एक करोड़ उनसठ लाख नगद जप्त किया था वहीं अन्य कर्मचारी  भी इस पूरे घोटाले में प्रारंभिक रूप से लिप्त पाये गये. 12 अधिकारियों को गिरफतार  भी किया गया. सरकार की तरफ से आईएएस अफसरों के खिलाफ कार्रवाही के रूप  में सिर्फ इतना किया कि उन्हें एक विभाग से सरकाकर दूसरे  विभाग में कर दिया गया जबकि अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ बर्खास्तगी  की कार्रवाही की गई. नान  घोटाले के पूर्व एक आईए एस अधिकारी  के ठिकानों से करोड़ों रूपये की संपत्ति मिली थी. उक्त अफसर को सरकार ने पुन: नौकरी पर लेकर अब उसे प्रमोशन भी  दे दिया गया है. ऐसे निर्णयों से तो लोगों का विश्वास काननू और सरकार से उठना स्वाभाविक है. नान मामले में अब नये कानून के तहत कार्रवाई होगी जिसमें अनुपातहीन  संपत्ति को जप्त भी किया जा सकता है. जेल भेजे जाने का प्रावधान भी है. देखना है आगे क्या होता है.

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काले धूल के राक्षसों का उत्पात...क्यों खामोश है प्रशासन

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चौकाने वाली बात यह है कि वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है. यह संख्या चीन से ज्यादा है.प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण से जहां 1640 लोगों की मौत के मुकाबले चीन में वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या (1620 ) ज्यादा है. यह आंकड़े हम यहां इसलिये पेश कर रहे हैं ताकि रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये इसपर नियंत्रण पाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये. वायूु प्रदूषण के बगैर स्मार्ट सिटी,डिजिटल सिटी बनाने का सपना पूरा हो पाना कठिन है. आज स्थिति यह है कि एक स्थान पर कालेधूल को हटाया जाता है तो शहर का दूसरा भाग कालिख पुतवा लेत…

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रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर 2010

ऊँची दुकान फीके पक वान!
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