आखिर सरकार ने ध्यान दिया, अब धान के साथ फल और ड्राय फ्र्रूट की भी खेती...!



अगर ऐसा होता है तो यह छत्तीसगढ़ की उन्नती और विकास में चार चांद लगा देगा, जी हां! हम बात कर रहे हैं कृषि के क्षेत्र में आने वाली नई नीति के बारे में जिसमेें सरगुजा को फल और बस्तर को फ्रूट उत्पादन के क्षेत्र में बढ़ावा देने का है. यहां हम बता दें कि सरगुजा का क्षेत्र फलों के उत्पादन में अभी से अग्रणी हैं. इस क्षेत्र में नारियल, कटहल जैसे दक्षिण में बहुतायत से होने वाले फलों के वृक्ष खूब फल देते हैं तो लिची का उत्पादन भी यहां भारी तादात में होता है. फलों के उत्पादन की दृष्टि से इस इलाके का मौसम भी अनुकूल है. हम अपने इन्हीं कालमों में पहले ही इस फसल को बढ़ावा देने का अनुरोध करते रहे हैं. उसी प्रकार बस्तर में भी मौसम ड्राय फ्रूट विशेषकर काजू के उत्पादन के लिये अनुकूल है. सरकार किसानों को प्रोत्साहित करें तो हर तरह की फसल छत्तीसगढ़ में ली जा सकती है. काफी-चाय का उत्पादन भी यहां किया जा सकता है. मसालों के लिये भी छत्तीसगढ़ के कई इलाके अनुकूल साबित हो चुके हैं. अनार की खेती के लिये भी इस अंचल का मौसम अनुकूल है. इन सबके लिये मौसम के आधार पर पानी की पर्याप्त व्यवस्था करनी भी जरूरी है क्योंकि इन पौधों में गर्मी सहन करने की शक्ति बहुत कम है. रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात में हरित क्र ांति की बात कही है, ठीक उसके बाद छत्तीसगढ़ में कृषि नीति के संबन्ध में आई सोच ने इस महत्वपूर्ण मसले के संबन्ध में एक ठोस पहल की है. प्रधानमंत्री ने मेड़ों में बाढ़ की जगह ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण की बात कही है. वास्तविकता यही है कि बड़े फलदार वृक्षों के पौधों को इसी तरह लिया जाना चाहिये ताकि अन्य फसल को भी धूप-छांव मिलती रहे. वृक्षारोपण का एक लम्बा और बड़ा कार्य इस मानसून सत्र के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार हाथ में लेेने जा रही है. छत्तीसगढ़ के बदलते मौसम और सड़क ों के चौड़ीकरण में काटे गये वृक्षों के परिप्रेक्ष्य में भी इस कार्यक्रम का अपना अलग महत्व है. दूसरी सबसे बड़ी बात यह कि हम कृषि भूमि का जिस तरह से कांक्रीट के जगल बनाने में उपयोग कर रहे हैं वह भी अब चिंता का विषय बनता जा रहा है. भारी मात्रा में कृषि भूमि भवन बनाने, उद्योग लगाने में जा रही है ऐसे में जो बची कृषि भूमि है उसका सही उपयोग हो इसके लिये सरकारी तौर पर प्राथमिकता से प्रयास जरूरी है वरना एक दिन ऐसा आयेगा जब पूरा छत्तीसगढ़ हरियाली की जगह कांक्रीट का जंगल नजर आयेगा. सड़कों पर भविष्य में लगाये जाने वाले पौधों में से अधिकांश वन  विभाग को अपने संरक्षण में लेकर ज्यादातर फलदार ही लगाने  चाहिये जिससे हमारी आवश्यकता भी पूरी हो और सड़क हरियाली से बिखर जाये. आम, इमली, कटहल, नारियल जैसे वृक्षों को अन्य वृक्षों के साथ भारी संख्या में लगाकर छत्तीसगढ़ की प्रत्येक सड़कों को आकर्षक बनाया जाना चाहिये.

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