शुक्रवार, 12 जून 2015

पेट्रोल पंपों में ऐसा भी होता है? नोज़ल पर उंगली के जादू से होती है भारी कमाई!


पेट्रोल पंपों में ऐसा भी होता
है? नोज़ल पर उंगली के
जादू से होती है भारी कमाई!

इस समय की सबसे कीमती वस्तुओं में से एक है पेट्रोल-डीजल! देश की अर्थव्यवस्था भी इसी से तय हो रही हैै- पेट्रोल डीजल के भाव बढ़े नहीं कि वस्तुओं के भाव भी बढ़ जाते हैं, यही नहीं यात्रा करना भी महंगा हो जाता है, माल  परिवहन बढ़ जाता है- ऐसे में आम आदमी के जीवन में पेट्रोल-डीजल की क्या अहमियत होती है यह समझाने की जरूरत नहीं है. अगर पेट्रोल-डीजल में पंप से ही डंडी मारने लगे तो मुसीबत सीधे आम जनता के गले पड़़ती है. हाल ही में की गई एक गुप्त जांच-पड़ताल में एक सूत्र ने जो तथ्य एकत्रित किये हैं वह काफी चौंकाने वाले हैं. आप पंप वाले को पेट्रोल-डीजल भराने का पूरा पैसा देते हैं, वह आपके सामने उतना ही पेट्रोल भरता भी है जितना आपने मांगा है, लेकिन क्या ऐसा होता है? वास्तविकता कुछ और है- आपकी गाड़ी में पेट्रोल या डीजल जो भी भरते हैं वह नाप-तौल विभाग और पेट्रोल पंप मालिक के बीच एक एडजस्टमेंट पर चलता है जिसकी जानकारी उपभोक्ता को नहीं रहती. अगर आप सही माप करें तो आपको पता चलेगा कि आप पेट्रोल पंप पर बुरी तरह लुट गये हैं. आपके सामने कुछ हुआ है और जांच कराओ तो कुछ और निकलेगा. आपकी गाड़ी में कम पेट्रोल जानकर चौंक पड़ेंगे!  कैसे चोरी होता है पेट्रोल? कैसे लगती है आपकी जेब पर चपत? वैसे चोरी कई तरह से होती है जिसमें एक मालिक और नाप-तौल इंस्पेक्टर के बीच एडजस्टमेंट है तो दूसरा स्वयं मालिक व कर्मचारियों की तरफ से होने वाला खेल! - जब मीटर चलता है तो पेट्रोल पंप वाले कम पेट्रोल कैसे डाल देते है? जब कोई हजार रुपये का पेट्रोल भरवाता है तो कर्मचारी पहले मीटर में शून्य करता है फिर उसमें हजार रुपए फीड करता है और नोज़ल लेकर पेट्रोल डालने लगता है. इस समय में उसने जो खेल खेला वही इस पूरे काली कमाई का क्लाइमैक्स होता है. नोज़ल का स्विच एक बार दबा देने पर स्वत: पेट्रोल टंकी में गिरने लगता है. लेकिन अचानक वह अपने हाथ में फिर हरकत कर पेट्रोल को टंकी में जाने से रोक देता है लेकिन मीटर चलता रहता है आपका ध्यान मीटर पर और इधर कर्मचारी की हरकत नोज़ल पर चलती है. होता कुछ यूं है कि जिस नोज़ल से कर्मचारी पेट्रोल डालते हैं उसका संबंध मीटर से होता है. अगर मीटर में 200 रुपए का पेट्रोल फीड किया गया है तो एक बार नोज़ल का स्विच दबाने पर स्वत: 200 रुपए का पेट्रोल डल जायेगा उसे ऑफ करने की कोई ज़रूरत नहीं पड़ती. स्विच सिर्फ मीटर को ऑन करने के लिए होता है उसका ऑफ से कोई संबंध नहीं होता क्योंकि मीटर फीड की हुई वैल्यू खत्म होने पर रुक जाता है, अगर पेट्रोल डालते समय नोज़ल का स्विच बंद कर दिया जाये तो मीटर चलता रहता है लेकिन नोज़ल बंद होने की वजह से पेट्रोल बाहर नहीं निकलता, इसी बात का फायदा उठाकर कर्मचारी करते ये हैं कि जब भी कोई पेट्रोल डलवाता है तो बीच-बीच में स्विच ऑफ कर देते हैं जिससे रुक-रुककर पेट्रोल टंकी में जाता है और हम कंपनी को कोसकर चुप हो जाते हंै. फज़र् कीजिये आप पेट्रोल पम्प पर गये और 200 रुपए का पेट्रोल डलवाया, 200 रुपए का पेट्रोल डलने में 30-45 सेकंड का समय लगता है, आपका सारा ध्यान मीटर की रीडिंग पढ़ने में निकल जाता है और अगर ये लोग 10 सेकंड के लिए भी स्विच ऑफ करते हंै तो समझ लीजिये आपका 50 रुपए का पेट्रोल कम डाला गया है।
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