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सुर्खियों का एक दिन-'मरे चौदह सौ , 'नक्सलियों पर नहीं होगा सेना का हमला... और गले मिले 'मूणत-बृज!


सुर्खियों का एक दिन-'मरे चौदह सौ ,
'नक्सलियों पर नहीं होगा सेना का
हमला... और गले मिले 'मूणत-बृज!

देश का पारा इस समय सातवें आसमान पर है- अब तक भीषण गर्मी से करीब 1400 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. यह मुसीबत भी किसी भूकंप से कम नहीं है. दो चार दिन बाद अच्छे दिन आने की भी खबर है. मानसून तीस मई को केरल पहुंच जायेगा, ऐसा मौसम विभाग वाले ताल ठोककर कह रहे हैं. वैसे यह भी कहा जा रहा है कि अल नीनो की सक्रियता के कारण मानसून आने में देरी हो सकती है. बहरहाल भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर बुधवार को रायपुर में थे उनने यहां आने के बाद प्रमुख बात यह कही कि नक्सलियों से निपटने के लिये सेना का उपयोग नहीं किया जायेगा. यह बात पूर्व रक्षा मंत्री व अब मंत्री वीपी सिंह भी कह चुके हैं. जबकि यूपीए सरकार में रक्षा मंत्री ए. के. एंटोनी ने भी यह स्पष्ट किया था कि सेना का उपयोग नहीं किया जायेगा. सवाल अब यहां यह उठ रहा है कि सरकार किस फार्मूर्ले से इस समस्या का समाधान निकालने जा रही है? यह भी  सवाल है कि क्या समस्या सदैव ऐसी ही बनी रहेगी? मुख्यमंत्री  डा. रमन सिंह भी नक्सलियों को माटी पुत्र कह चुके हैं. इधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच बुधवार को जोरदार वाक युद्ध हुआ. मोदी ने टिप्पणी की कि यूपीए सरकार में सोनिया असंवैधानिक अथॉरिटी थी, इसके बाद सदा चुप्पी साधे रहने वाले मनमोहन सिंह ने कहा कि मैंने अपने परिवार या मित्रों के फायदे के लिये कभी सरकारी पद का दुरूपयोग नहीं किया. दोनों ने यह बातें दिन में कही लेकिन जब शाम हुई तो दोनों गर्मजोशी से मिले, फिर मोदी ने कहा -उनसे मिलकर बहुत खुशी हुई. इधर छत्तीसगढ़़ में सत्ता के पूर्व-पश्चिम, बृजमोहन-राजेश मूणत को एक बड़े समारोह में एक साथ दांये-बांये, हंसी-खुशी  देख टिप्पणीकारों को कुछ अजूबा लगा और फोटो भी खीचीं. दिल्ली में आप की सरकार का केन्द्र से अप्रत्यक्ष युद्ध छिड़ गया है. एलजी के नोटिफिकेशन के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर दिया गया है. नेता लोग अपनी बात को बड़ी आसानी से पलट देते हैं. केन्द्रीय मंत्री रिजिजू ने मंगलवार को गो मांस पर एक बयान दिया था, उसे गुरुवार को पलट दिया- मैंने तो ऐसा नहीं कहा था. केन्द्रीय शिक्षा मंत्री स्मृति इरानी अमेठी में भाई-बहन से परेशान हैं. स्मृति को अब प्रियंका पर गुस्सा आ गया. प्रियंका ने  कहा था कि अमेठी में ट्रिपल आईटी क्यों नहीं है? इसके जवाब में वे कहती हैं कि यह अजीब है कि एक चुना हुआ सांसद हारी हुई उम्मीदवार से विकास के लिये मदद मांग रही है, मगर स्मृति शायद यह भूल गई कि हारने के बाद वे देश की मानव संसाधन मंत्री भी हैं. विदेश की खबरों की ओर नजर दौड़ायें तो मीडिया की दबंगता की एक मिसाल देखेने को मिलती है. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के एक इंटरव्यू की रिपोर्टिंग को सरकारी आपत्ति के बावजूद पत्र के प्रधानसंपादक ने किसी प्रकार के संशोधन से इंकार कर दिया. एक खबर अमरीका के जार्जिया शहर की -वहां एक महिला को पुलिस ने इसलिये गिरफतार कर लिया चूंकि उनका लाडला 12 दिन तक स्कूल में गैर हाजिर रहा. ऐसी होती है मां-बाप की जवाबदेही. इससे क्या हमारे देश के लोग कुछ सीखेगें? यहां बच्चा सालभर स्कूल न जाये तो किसी को कोई फर्कनहीं पड़ता उलटा परीक्षा भी उसकी घर पर ही हो जाती है और पास भी प्रथम श्रेणी में हो जाता है!

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उम्र कैद की सजा पर से संदेह खत्म! क्या फांसी की सजा पर भी सुको सज्ञान लेगी?

याकूब मेनन को फांसी  से पहले व बाद से यह बहस का विषय है कि फांसी दी जानी चाहिये या नहीं अभी भी इसपर बहस जारी है लेकिन इस बीच उम्र कैद का मामला भी सुर्खियों में है कि आखिर उम्र कैद होती है, तो कितने साल की? यह माना जाता रहा है कि उम्र कैद का मतलब है- चौदह साल जेल लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि उम्र कैद चौदह साल नहीं बल्कि ताउम्र है याने अपराधी की जब तक जिंदगी है तब तक उसे जेल में ही काटनी होगी. छत्तीसगढ के धीरज कुमार, शैलेन्द्र और तीन दोषियों के मामले में याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और वी गोपाला गोवड़ा की बेंच ने समाज के एक वर्ग द्वारा फांसी की सजा के विरूद्व अभियान पर टिप्पणी करते हुए कहा की यह वर्ग चाहता है कि फांसी को खत्म कर उसकी जगह आजीवन कारावास की सजा दी जाये तथा स्पष्ट किया कि उम्र कैद का मतलब उम्र कैद होता है न कि चौदह साल. अपराधी जिसे उम्र कैद हुई है उसे अपनी पूरी उम्र सलाखों के पीछे बितानी होगी. इससे यह तो संकेत मिलता है कि भविष्य में फांसी को खत्म करने पर भी विचार किया जा सकता है. सर्वोच्च अदालत ने अब तक उम्र कैद के संबन्ध में चली…

काले धूल के राक्षसों का उत्पात...क्यों खामोश है प्रशासन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के औद्योगिक क्षेत्रों-उरला, सिलतरा, सोनढोंगरी,भनपुरी से निकलने वाली काली रासायनिक धूल ने पूरे शहर को अपनी जकड़  में ले लिया है .यह धूल आस्ट्रेलिया के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाली धूल से 18 हजार गुना ज्यादा है.
यहां करीब तीन दर्जन उद्योग ऐसे हैं जो चौबीसों घंटे धूल भरी आंधी उगल रहे हैंं ,जिसपर किसी का कोई नियंत्रण नहीं ह्रै. नियंत्रण है तो भी वह कुछ दिनों में छूटकर आसमान और धरती दोनों पर कब्जा कर लेते हैं.
चौकाने वाली बात यह है कि वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है. यह संख्या चीन से ज्यादा है.प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण से जहां 1640 लोगों की मौत के मुकाबले चीन में वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या (1620 ) ज्यादा है. यह आंकड़े हम यहां इसलिये पेश कर रहे हैं ताकि रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये इसपर नियंत्रण पाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये. वायूु प्रदूषण के बगैर स्मार्ट सिटी,डिजिटल सिटी बनाने का सपना पूरा हो पाना कठिन है. आज स्थिति यह है कि एक स्थान पर कालेधूल को हटाया जाता है तो शहर का दूसरा भाग कालिख पुतवा लेत…

ऊची दुकान फीके पकवान!

रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर 2010

ऊँची दुकान फीके पक वान!
कभी बच्चो को परोसे जाने वाला मध्यान्ह भोजन तो कभी होटल, रेस्टोरेंट से खरीदी गई खाने की सामग्री तो कभी किसी समारोह में वितरित होने वाले भोजन के जहरीले होने और उसको खाने से लोगों के बीमार पडऩे की बात आम हो गई हैं। अभी बीते सप्ताह शनिवार को नई राजधानी में सड़क निर्माण कंपनी के मेस का खाना खाकर कई मजदूर बीमार हो गये। कइयों की हालत गंभीर थी। मेस को हैदराबाद की बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी चला रही थी। सबसे पहला सवाल यह उठता है कि जब कोई कंपनी या समारोह में इतने व्यक्तियों का खाना एक साथ पकता है उसे लोगों में बांटने के पहले जांच क्यों नहीं होती? खाना बनाने से पहले यह क्यों नहीं देखा जाता कि जहां खाना बनाया जा रहा है वहां का वातावरण पूर्ण साफ सुथरा है या नहीं। स्कूलों में बच्चों को वितरित होने वाले मध्यान्ह भोजन में भी कुछ इसी तरह का होता आ रहा है। बच्चो को जो खाना बनाने के लिये कच्चा माल पहुँचता है उसका उपयोग करने से पहले उसकी सही जांच पड़ताल नहीं होती फलत: उसमें कीड़े मकोड़े व अन्य जीव जन्तु भी मिल जाते हैं। अक्सर समारोह व शादी …