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और कितने शरद प्रशंसा, लवकुमार मारे जायेंगे



घरेलू हिंसा रोकने सरकार शराब बंद करें, मुफत अनाज की जगह काम के बदले राशन बांटे

गौतम, शरद, विनय, प्रशंसा, लवकुमार यह छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के कुछ ऐसे मासूम बच्चे थे जिनने कम से कम ग्यारह माह से लेकर छह साल तक की जंदगी जी और बाद में माता पिता के बीच घरेलू कलह के चलते अथवा किसी प्रेम संबन्ध के चलते उन्हें इस दुनिया से रूकसत कर दिया. ऐस और भी बच्चे हैं,जिन्हें पूर्व में मार दिया गया जिनका नाम हमारें पास नहीं हैं. मारने वाले ओर कोई नहीं बल्कि इनकी खुद की मां थी या फिर इनका शराबी पिता. अपना अडियल रवैया या शराब की लत, अथवा जिद छोटे छोटे बच्चों की मृत्यु का कारण बन रहे हैं.प्राय: सभी घटनाओं के पीछे घरेलू हिंसा,आर्थिक तंगी और शराब एक वजह है, जो परिवार की कलह और  मासूम बच्चों की मौत का कारण बन रही है. इन सबमें प्रमुख वजह शराब है.पिछले साल एक शराबी पिता ने वाल्मिकी नगर की गौतम छै साल, शरद चार साल और विनय दो साल को शराब के नशे में मौत के घाट उतार दिया था. इन बेचारों का क्या कसूर था? पति- पत्नी के बीच विवाद इनकी मौत का कारण बना. कोई सामान्य आदमी जो कृत्य नहीं कर सकता वह कृत्य शराब पीने के बाद कर जाता है, यही कृत्य इन बच्चो के पिता नीलम मिश्रा ने किया था वह एक और बच्चे व पत्नी को भी मार देना चाहता था लेकिन वे बच निकले. छत्तीसगढ़ सरकार खूब शराब परोस रही है.कम राजस्व हुई तो पूछताछ होती है, ज्यादा बढ़ाने के लिये और दुकाने खोल दी जाती है. अगर इससे भी पूरा नहीं हुआ तो गली- गली मोहल्लों में शराब सब्जी भाजी की तरह बेची जाती है. अच्छा भला आदमी इस लत में पड़कर हैवान बन जाता है और हमारी सरकार को इन हैवानों से ज्यादा अपने खजाने की चिंता रहती है.शराब पीकर होने वाले इस हैवानियत को सरकार घरेलू हिंसा कहकर आंख मूंद लेती है और इसकी असली वजह पर किसी प्रकार लगाम लगाने का प्रयास नहीं किया जाता. टिकरापारा में अभी दो दिन पहले शराबी बाप ने अपनी दुधमुंंहे बेटे को पत्नी से विवाद के बाद इसलिये मौत के घाट उतार दिया चूंकि वह रोना बंद नहीं कर रहा था.अक्टूबर 2013 में उरला निवासी राजेन्द्र देवांगन ने अपने साढ़े तीन साल के बेटे को तालाब में नहाने ले जाने के बहाने उसे डुबाकर इसलिये मार डाला चूंकि उसका इश्क दूसरी महिला से चल रहा था. घरेलू हिसां आर शराब का चौली दामन का साथ है. अधिकांश ऐसी घटनाएं शराब सेवन के साथ ही शुरू होती हैं जो वीभत्स रूप लेकर खत्म होती है. राजधानी के देवेन्द्र नगर के रैनी जैन का उसके पति प्रकाश जैन से तेरह माह की बच्ची को ब्यूटी पार्लर ले जाने से मना करने पर विवाद हुआ और उसने बच्ची की गला घोटकर हत्या कर दी घरेलू हिंसा की शुरूआत आमतौर पर आर्थिक तंगी से शुरू होती है. पैसा हाथ में रहे तो सब खुश वरना जिंदगी को बचे पैसे से शराब में डुबों दिया जाता है इसका पूरा प्रबंध सरकार की तरफ  से है. दारू सस्ते में मिलती है.बिलो पावरटी लाइन के नाम से सुविधाएं भी दी जाती हंै.महिलाएं राशन एकत्रित कर लाती है पुरूषों का एक बहुत बड़ा वर्ग शराब में अपने आपको डुबो लेता है और इसके बाद जो कुछ होता है सब देख ही रहे हैं. जहां तक छत्तीसगढ़ में घरेलू हिंसा का कारण है वह या तो प्रेम संबन्धों को लेकर है या फिर आर्थिक तंगी  को लेकर अथवा शराब को लेकर.दारू पीकर  लोग, घर, पडोसियों यहां तक कि पूरे मोहल्ले के लिये सरदर्द बन रहे हैं इसमें अगर समाज सामने आये तो वह भी मुसीबत में पड़ जाता है ऐसे में सरकार को शराब पर पूर्ण प्रतिबंध के साथ जो राशन वह मुफत मे बांट रही है उसके स्थान पर ऐसे परिवारों के बच्चों के लिये फिक्स डिपाजिट में पैसा जमा कराने के बारे में सोचना  चाहिये ऐसे परिवारों के मुखिया के लिये काम के बदले पैसे की व्यवस्था करें तभी इस समस्या का हल  संभव है.मुफत अनाज लोगों को आलसी व निठल्ला बना रही है लोगों को काम के प्रति लापरवाह बना रही है. कई रूके पड़े काम नहीं हो रहे हैं. जब मुफत में भोजन मुंह तक पहुंच रहा है तब लोग काम क्यों करें?- जो पैसा जैसे तैसा परिवार की महिला व अन्य सदस्यों से जैसे तैसे मिलता है वह शराब और ऐश में लुटाने की आदत लोगों में पड़ गई है-बिलो पावर्टी लाइन में घूरेलू हिंसा कुछ इन्हीें  कारणों से बढ़ रही है. सरकार शराब पर पाबंधी लगाये, बीपीएल परिवारों को मुफत अनाज की जगह या तो उनके बच्चों के एकाउन्ट में फिक्स जमा कराये या फिर काम के बदले अनाज की व्यवस्था करें यह ही एक उपाय है समृद्वि और घरेलू हिंसा रोकने  का!

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