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युवा वोटरों की अपेक्षाएं..."जादू की छड़ी घुमायेंगे मोदी"


युवा वोटरों की अपेक्षाएं..."जादू की छड़ी घुमायेंगे मोदी"
निशुल्क शिक्षा,चौबीस घंटे बिजली, एकल टैक्स,  जैसे ग्यारह अनुरोध...
युवा मतदाताओं का एक बहुत बड़ा वर्ग, जिनकी संख्या करीब 2.31 करोड होती है, पहली बार मतदान में हिस्सा लिया- भाजपा जनता पार्टी के पीएम उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी पर वे एक तरह से फिदा थे. वर्तमान भ्रष्ट सरकार से उनका विश्वास उठ चुका था. शायद यही कारण था कि उसने नरेन्द्र मोदी पर इतना विश्वास किया कि वोट देने के मामले में उन्होंने अपने अभिावकों तक की नहीं सुनी. इन नये मतदाताओं पर राजनीतिक दलों की पैनी नजर थी और चुनाव में भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले युवाओं का समर्थन अधिक प्राप्त हुआ. मोदी के मोहित करने वाली बातों तथा नये भारत के लिये जो सपने दिखाये उसने पूरे देश में ऐसा माहौल खड़ा कर दिया कि उसके आगे वे सम्मोहित हो गये तथा पुराने युवाओं को, जो एक लम्बे समय से दूसरी  पार्टियों के साथ जुड़े हुए थे उन्हें भी अपने साथ मिलाने  में कामयाब हो गये.एक तरह से युवा मतदाताओं के आगे यह नये मतदाता हावी हो गये तथा सारी बाजी पलट दी. अब चुनाव के बाद नरेन्द्र मोदी से युवा यह आशा कर रहे है कि वे उनकी आशाओं को पूरा करने में समय न गवायें तथा हर वायदे को जल्द पूरा करें. इन युवाओं को लग रहा है कि नरेन्द्र मोदी के पास ऐसी कोई जादू की छड़ी है,जो तत्काल देश में मंहगाई को कम कर देगा.निशुल्क शिक्षा, चौबीस घंटे हर घर को बिजली, हर घर को पानी और अन्य ऐसी ही सुविधाएं बस पद ग्रहण करते ही एक झटके में प्रदान करने की बात यह युवा कर रहे हैं.  सोशल मीडिया में ऐसे  युवाओं द्वारा भावी प्रधानमंत्री को लिखे गये एक पत्र में भी यह बात उन्होंने सिलसिलेवार कह डाली हैं पत्र का मजमून उन्हें संबोधित है जिसमें कहा गया हैै-
1.बिना अवरोध के 365 दिन चौबीस घंटे बिजली घरेलू के लिये तीन  रूपये और व्यावसायिक पांच रूपये के हिसाब से दी जाये.
2.गर्मी के दिनों सहित पूरे दिन शुद्व पेय जल की  पूर्ति हो.
3. भारत के सभी गांवो को जोड़ने  के लिये पक्की  सड़के बनाई जायेेे.
4.तेज चलने  वाली ट्रेने, और हमारा रेलवे अगले  पांच वर्षो में विश्व का सबसे बेस्ट रेलवे होना चाहिये.
5. बिना किसी झिझक के 'एकल टैक्स प्रणालीÓ लागू की  जाये
6.लालफीताशाही के बगैर का सर्वोत्तम प्रशासन, जिसमे भ्रष्टाचार का कोई स्थान न हो, ऐसी व्यवस्था हो.
7.होम लोन 6 प्रतिशत प्रति वर्ष, व्यावसायिक लोन 8 प्रतिशत प्रतिवर्ष एंव नि:शुल्क शिक्षा तथा नि:शुल्क चिकित्सा प्रदान की जाये
8.खुदरा एफडीआई न हो
9. सभी भारतीयों के लिये एक जैसा कानून हो.
10.समान अधिकार और कमाई का लाभ जाति के आधार पर न होकर कमाई के आधार पर हो.
11.डालर की कीमत को आगामी पांच वर्षो में पैतीस रूपये तक पहंचाया जाये. इससे स्वत: ही पेट्रोल, गैस और सोने के भाव में गिरावट आयेगी
11 स्विस बैंक और विदेशों में जमा कालाधन  को वापस लाया जाये
12 पुलिस को नागरिकों से मित्रवत व्यवहार के लायक बनाया जाये
गंभीर अपराधों के मामलों पर निर्णय के लिये अधिकतम छै महीने की समय सीमा निश्चित की जायेे
इन युवाओं को आशा  है कि अगले  साठ माह में नरेन्द्र मोदी यह सब कर डालेंगे ताकि अगली बार लोग 'अबकी बार मोदी सरकारÓ की जगह यह कहने लगे कि 'बार बार मोदी सरकार.Ó
चुनाव में भाजपा को 39 प्रतिशत युवाओं का समर्थन मिला, जबकि कांग्रेस पर सिर्फ 19 प्रतिशत युवाओं ने भरोसा जताया. युवाओं के सहयोग से दिल्ली में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी प्रदेश में एक भी सीट जीतने में सफल नहीं रही, हालांकि वह कांग्रेस को तीसरे स्थान पर धकेलने में सफल रही.राजनीतिक दलों ने नये मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए सोशल मीडिया तथा अन्य सूचना एवं संचार सुविधाओं का जबर्दस्त उपयोग किया था. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार देश के 81.45 करोड़ मतदाताओं में 2.31 करोड़ की आयु 18-19 वर्ष के बीच थी, जो कुल मतदाताओं का 2.8 प्रतिशत है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के 1.27 करोड़ मतदाताओं में 3.37 लाख मतदाताओं की आयु 18-19 वर्ष के बीच थी जो कुल मतदाताओं का 2.7 प्रतिशत थी। चुनाव में एक-एक मतों के महत्व को ध्यान रखते हुए विभिन्न दल इस युवा वर्ग को अपने पाले में लाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे थे.आम आदमी पार्टी ने अपने अभियानों में सोशल मीडिया का जमकर प्रयोग किया था इससे प्रभावित होकर या एक तरह से इस टेक्नीक को अपनी ओर खीचते हुए नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया को भी अपने प्रचार में महत्वपूणर््ा अंग बना लिया. लोकसभा की करीब 30 प्रतिशत सीटों के सोशल मीडिया से प्रभावित होने की बात  को गंभीरता से लेते हुए राजनीतिक दलों ने मतदाताओं से सीधे सम्पर्क जैसे परंपरागत माध्यम से चुनाव प्रचार करने के साथ सूचना एवं संचार सुविधाओं का जबर्दस्त उपयोग किया.सोशल मीडिया से युवा काफी संख्या में जुड़े हैं और चुनाव में इस वर्ग का काफी महत्व रहा. इस वर्ग तक सूचना एवं सम्पर्क के रूप में इंटरनेट, फेसबुक, ट्विटर आदि को आगे बढ़ाया गया.सोशल मीडिया पर अपने अभियान को गति देने और लोगों तक पहुंचने के प्रयास के तहत भाजपा ने मिशन 272 प्लस के तहत 60 स्वयंसेवकों की एक टीम बनायी थी, जिन्हें लोगों तक सकारात्मकता संदेश के साथ जुड़ने का दायित्व सौंपा गया था और इन्हें दो लाख लोगों में से चुना गया था। राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस ने भी युवा जोश जैसे अभियान के साथ युवाओं को जोड़ने की पहल की. कांग्रेस ने युवाओं को जोड़ने के लिए एक टीम भी बनाई मगर मोदी के मुकाबले राहुल ने यह काम बहुत बाद में उस समय किया जब मोदी प्रचार के हर मामले में आगे निकल चुके थे. राहुल का प्रचार दमदार होने के बाद भी असरदार नहीं रहा.चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 28 राज्यों एवं सात केंद्र शासित प्रदेशों में दादर एवं नागर हेवली में कुल मतदाताओं में 9.88 प्रतिशत युवा मतदाता (18-19 वर्ष) है, जबकि झारखंड में कुल मतदाताओं में 9.03 प्रतिशत युवा मतदाता हैं.अंडमान निकोबार में सबसे कम 1.1 प्रतिशत युवा मतदाता हैं. हिमाचल प्रदेश में कुल मतदाताओं का 1.3 प्रतिशत युवा मतदाता है. हिमाचल की चारों सीटें भाजपा के खाते में गईं.उत्तर प्रदेश में 18-19 वर्ष के 38.1 लाख मतदाता हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में 20.8 लाख 18-19 आयु वर्ग के मतदाता हैं.उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से 71 पर भाजपा ने जीत दर्ज की. पश्चिम बंगाल में युवाओं की हिस्सेदारी से भाजपा को अपना वोट प्रतिशत बढ़ाने में मदद मिली.दिल्ली की उत्तर पश्चिम सीट पर 18-19 वर्ष के 61,760 मतदाता हैं, वहीं पश्चिम दिल्ली सीट पर 55620, उत्तर पूर्व सीट पर 54889, पूर्वी दिल्ली सीट पर 46574 युवा मतदाता थे.दिल्ली की सभी सात सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की.पश्चिम बंगाल, केरल और तामिलनाडू के युवाओं पर नरेन्द्र मोदी का जादू नहीं चल सका जबकि केरल के युवाओं ने राहुल का साथ दिया. मोदी केरल और तामिलनाडू भी प्रचार हेतु पहुंचे किंतु वहां उनका जादू नहीं चल सका. हिन्दी बेल्ट के युवाओं का पूरा साथ मोदी के साथ रहा शायद यही कारण है कि  इन बेल्टों की क्षेत्रीय पार्टियां तक एकदम साफ हो गई.

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