गुरुवार, 6 मार्च 2014

मनुष्य के रक्त से ईश्वर को खुश करने का खेल!

कभी देवी को प्रसन्न करने के लिये तो कभी मन्नत पूरी कराने के लिये तो कभी अपने व्यवसाय की उन्नती के  लिये मनुष्य का खून कर देना सत्रहवीं सदी में माया संस्कृति से शुरू हुआ जो आज भी छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में मौजूद है।  नई संस्कृति,विज्ञान, टेक्नोलाजी सब इसके सामने फैल है। छत्तीसगढ़ के थान खम्हरिया में असफल नरबलि की कोशिश ने सोमवार को पूरे देश को हिलाकर रख दिया जब एनीकेट निर्माण में लगे ठेकेदार के आदमियों ने एक बारह साल के बच्चे अंकुश ़को पकडकर जिंदा दफन करने का प्रयास किया। वह तो छूट गया लेकिन इस घटना ने समा़ज को सोचने के लिये कई प्रश्र छोड़ दिये। आखिर हम किस युग में जी रहे हैं? और किस विकृ त मानसिकता तथा अंधविश्वास से पीड़ित लोगों को हमारे बीच पाल रहे हैं?
थान खम्हरिया में छत्तीसगढ़ सरकार के जल संसाधन विभाग का एनीकट निर्माण कार्य चल रहा है। कार्य ठेके पर दिया गया है, ठेेकेदार के मैनेजर और साथियों ने मिलकर शंकर निर्मलकर के आठ साल के बेेटे अंकुश निर्मलकर को उस समय उठा लिया जब वह शौच के लिये गया हुआ था। उसे मारपीट कर गला दबाते हुए बोरे में भरकर जिंदा दफन करने की कोशिश की जा रही थी तब उसकी चिल्लाहट सुन ग्रामीण एकत्रित हो गये और उसकी जान बच गई किन्तु इसके बाद जो हिंसा फैली उससे सभी परिचित हैं।
छत्तीसगढ़ में नरबलि के प्रयास व हत्या की यह पहली घटना नहीं है। वर्षो से यह सिलसिला चला आ रहा है। अंध विश्वास को दूर करने के प्रयास होते रहे लेकिन इसमें कोई कमी नहीं आई। नर बलि अपराध है और इसकी सजा मौत है लेकिन ग्रामीण इलाके की बात छोड़िये शहरी इलाके भी इससे अछूते नहीं हैं। अप्रैल 2013 को भाटापारा के खोखली गांव के एक बारह साल के लडके को चार बार चाकू घोंपने के बाद बुरी तरह जख्मी हालत में उसके माता पिता ने मेकाहारा में दाखिल किया था। इस लड़के को नवरात्र के दिन गांव में सरपंच के लड़के मुकेश साहू ने बलि देने के लिये मारने का प्रयास किया लेकिन वह उसमें सफल नहीं हो पाया।  बिलासपुर के जैलवारा गांव  में जनवरी 2012 को सात साल कि बच्ची ललिता टाटी का शव मिला। उसके शरीर के अवयव जिसमें यकृत भी शामिल है गायब था। पुलिस ने पहले शंका व्यक्त की कि रेप एण्ड मर्डर का केस है लेकिन गांव के ही सुक्कू को इस मामले में  गिरफतार किया तो हकीकत सामने आई। उसने अपने खेत में अच्छी फसल प्राप्त करने के लिये उसकी बलि चढाई थी। ऐसी ही एक घटना रायपुर से अस्सी किलोमीटर दूर धमतरी जिले के गांव बंजारी में हुई, जहां चार लोगों ने जिनमें दो महिलाएं भी थी ने छह साल के लड़के को दैविक शक्ति प्राप्त करने के नाम पर खत्म कर दिया।
छत्तीसगढ़ में नर बलि के लिये एक तांत्रिक को निचली अदालत से मौत की सजा प्राप्त हो चुकी है। अपे्रल सन् 2013 में रायगढ़ के इस तांत्रिक पर ग्यारह वर्षीय बालक की  बलि देने का आरोप है। हाल के दिनों में थानखम्हरिया की घटना के पूर्व ग्राम गोरखपुर कला की भूमिका साहू भी अपहरकर्ताओं के चंगुल से किसी प्रकार  बच निकली है जबकि कवर्धा जिले के गा्रम सूरजपुरा केदो बच्च्चों को पकड़ने का प्रयास कतिपय लोगों ने किया। कवर्धा जिले के ही रणवीरपुर के दो  बच्चे अभी भी गायब ब़ताये जाते हैं।
छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, मेघालय,आन्ध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, यहां तक कि मुम्बई के आसपास भी नरबलि की घटनाओं ने सुर्खियां बनाई है। झारखंड के लोहार डग्गा मे एक पति ने भगवान को प्रसन्न करने केनाम पर अपनी पत्नी का ही सिर धड़ से अलग कर दिया। वहीं मुम्बई के पास नलासोपरा में एक लड़के और लड़की को शैतान भगाने के नाम पर पीट पीटकर मार डाला।आन्ध्र प्रदेश में गांव वालों ने छिपा धन निकालने के नाम पर चौदव साल के लड़के कि बलि दे दी।असम के विख्यात कामाख्या मंदिर में मिले एक मनुष्य के सिर को भी पुलिस ने नरबलि ही कहा था। नरबलि भारतीय दंड विधान धारओं के तहत गंभीर अपराध है लेकिन क्या धाराएं इस अपराध पर लगाम लगा रही हैं। अपराध होने के बाद प्रतिक्रिया होती है लेकिन कुछ दिन में सब शांत! उसके बाद फिर घटना होती है.... फिर प्रतिक्रिया होती है...आज तो विधानसभा में भी थानखम्हरिया के नरबलि प्रयास की गूंज रही। पता नहीं कब समाज को ऐसे घिनौने अपराधों से मुक्ति मिलेगी।12