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नाश्ते में चोरी, मारपीट...लंच में अपहरण-हत्या

रायपुर दिनांक 24 जनवरी 2011

नाश्ते में चोरी, मारपीट...लंच में अपहरण-हत्या
छत्तीसगढ़ बनी अपराध की मंडी!
पोह फटने के साथ ही अगर किसी शहर में अपराध का खाता खुल जाये तो यह अंदाज लगाया जा सकता है कि उस शहर मे अपराध की दौड़ कितनी फास्ट होगी। रात गश्त(? ) पर निकले पुलिस वाले अभी उठ भी नहीं पाते कि चोरी-मारपीट की घटनाओं से उनका नाश्ता तैयार हो जाता है और रात तक अपराध के कई पकवान तैयार हो जाते है। पिछली रात छुरा गरियांबद में पत्रकार के खून से रंगी पिस्तौल से निकला खून अभी सूख भी नहीं पाया था कि रायपुर का डूमरतलाब पिस्तौल की धूं धू सेे कांप उठा। चौबीस घंटे के भीतर एक ही तरह की दो वारदातों ने पुलिस तंत्र को तो हिला ही दिया मगर सबसे ज्यादा दहशत में आम नागरिक है जो यह समझ ही नहीं पा रहा है कि छत्तीसगढ़ के शहरों में अचानक यह कौन सी आफत आन पड़ी है। बिलासपुर, रायपुर, छुरा तीन जगह एक ही तरह की वारदात- बिलासपुर में पत्रकार सुशील पाठक की गोली मारकर हत्या, रायपुर में राजेश सिह डागा की गोली मारकर हत्या और छ़ुरा मे पत्रकार उमेश राजपूत की हत्या लगभग लगभग एक ही तरह से हुई। कोई भी दो चके की गाड़ी पर नकाब लगाकर आपके- हमारे घर में घुस सकता है और किसी को भी अपनी गोली का निशाना बना सकता है। पुलिस की भूमिका वैसे घटना के बाद शुरू होती है किंतु वह उसमे भी फैल नजर आ रही है। अपराधी तत्वों के खिलाफ एहतियाती कदम मसलन किराये से घरों रहने वाले लोगों, होटलो-धर्मशालाओं, बसस्टैण्ड,रेलवे स्टेशन में घूमते अपराधियों पर कड़ी नजर रखी जाये व मजबूत पुलिस बंदोबस्त किया जाये तो काफी हद तक अपराधियों पर काबू पाया जा सकता है। पत्रकार सुशील पाठक मामले में पुलिस हाथ मलकर बैठ गई है। उमेश राजपूत मामले में उसे धमकी देने वाली महिला को जरूर पकड़ लिया गया है किेंतु शूटर कहां गये? डृमरतालाब रायपुर में राजेश सिंह डागा की गोली मारकर हत्या पुलिस के लिये इसलिये चुनौती बन गई चूंकि हत्यारों ने उसे मारने के लिये पुुलिस थाने से मात्र सौ मीटर दूरी को चुना। पुलिस का कहना है कि मृतक पर चंदन तस्करी का आरोप है, 2010 में उसके खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद से वह फरारी के दिन काट रहा था। पुलिस इस बात के लिये भी जवाबदेह है कि एक फरार आरापी उसकी नाक के नीचे चमचमाती कार में घूम रहा है और उसे इस बात की जानकारी तक नहीं है। इससे इस बात का अनुमान भी लगाया जा सकता है कि छत्तीसगढ़ में पुलिस का खुफिया तंत्र कितना मजबूत है? इन हत्याकांडों से यह भी स्पष्ट हो गया है कि सुपारी लेकर हत्या करने वालों को कोई खतरनाक गिरोह इस अंचल में सक्रिय हो गया है। चौबीस घंटे बाद गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित होने वाला है-इन घटनाओ के परिप्रेक्ष्य में इस बात का अंदाज लगाया जा सकता है कि पुलिस कितनी मुस्तैद है। दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के आपराधिक मंडी में अब हर किस्म के अपराधों की दुकाने सज गई है। अपहरण के बाद हत्या की भी कम से कम तीन ताजा वारदातें हो चुकी है। रीेतेश, दीपक और सत्यजीत तीन बच्चों की फिरौती के लिये मर्डर कर लाश को गटर में फेक दिया गया। कानून व्यवस्था पर एसी कमरों में बैठकर बड़ी बड़ी बात करने वालों के लिये अब यह जरूरी हो गया है कि वह मैदान मे आये और आम जनता को दहशत व अपराधियो से मुक्ति दिलायें।

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रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर 2010

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