शनिवार, 22 जनवरी 2011

हर भारतीय चाहता है चप्पे- चप्पे पर तिरंगा फहराये लेकिन बंदूक और तनाव के बीच नहीं!

रायपुर शनिवार 22 जनवरी 2011

हर भारतीय चाहता है चप्पे- चप्पे
पर तिरंगा फहराये लेकिन
बंदूक और तनाव के बीच नहीं!
छब्बीस जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर कश्मीर के लाल चौक में भाजपा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने का निर्णय कश्मीर में लौट आई शांति को कितना कायम रख सकेगी यह अब सोचने का विषय बन गया है। हर राष्ट्रभक्त भारतीय चाहता है कि गणतंत्र पर भारत भूमि के चप्पे चप्पे पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाये लेकिन तिरंगा बंूदक और तनाव के बीच फहराये यह कोई नहीं चाहता। शायद इसी आशंका को लेकर कश्मीर के मुख्यमंत्री ने भाजपा से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की बात कही है। उन्नीस सालो में यह पहला अवसर था जब सन् 2010 में कश्मीर के लाल चौक में गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया। इसके पीछे छिपे कारण पर गौर किया जाना चाहिये कि तब अर्थात सन् 1991 से लेकर 2009 तक लाल चौक पर तिरंगा सेना पूरे लावलश्कर के साथ अपने अंदाज में फहराती रही है। बीजेपी और जम्मू कश्मीर नेशनल कान्फ्रेंस की तनातनी के बीच इस बार कश्मीर में विशेषकर लालचौक में तिरंगे का राजनीतिकरण कर दिया गया है। इस सारे फसाद की जड़ है जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का नेता मोहम्मद यासीन मलिक जिसने धमकी दी है कि 'हम देखेंगे 26 जनवरी को लाल चौक पर तिरंगा कौन फहराता है। इसका सीधा सीधा मतलब यह है कि वह वहंा बैठक्रर पूरे देश में को ललकार रहा हैं। उसकी इस ललकार को अगर चुनौती के रूप में स्वीकार कर आगे बड़े तो शायद इसका नुकसान हमकों ही होगा। जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों को पाकिस्तान का सपोर्ट है उसी के बल पर वह इस प्रकार की ललकार कर रहा है। पाकिस्तान के हुकमरान देश में अशांति चाहते हैं यह अशातिं अगर जम्मू कश्मीर सहित पूरे देश में इस मुद्दे को लेकर भडकाकर हो तो उन्हें क्या फरक पड़ता है? जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ माहों से जो हालात बिगड़े हुए थे उसमें कुछ सुधार आने के बाद अब पुन: इस मुद्दे को लेकर आग लगने की आशकां है। बीजेपी और जेकेएलएफ दोनों झंडा फहराने के मुद्दे को लेकर एक तरह से आमने सामने हैं दोनों के तेवरों के बीच उमर फारूख एक तरह से नर्वस नजर आ रहे हैं उन्होने कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाये रखने के लिये केन्द्र से मदद की गुहार लगाई थी जिसे केन्द्र ने उनसे खुद इस मामले से निपटने व जरूरत पडऩे पर मदद देने का आश्वासन देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। कश्मीर देश का अतिसंवेदनशील राज्य है। मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि लाल चौक पर तिरंगा फहराने से व्यवस्था बिगड़ सकती है । भारत का अभिन्न अंग होने के नाते तिरंगा फहराना जरूरी भी है। यह काम कश्मीर के लोगों को ही करना चाहिये। कश्मीर भाजपा को इसमें अहम भूमिका निभानी चाहिये न कि पूरे देश को इसमें इनवाल्व कर पाक को अपने मकसद पर कामयाब होने का मौका दें। केन्द्र ने इस मामले में जो निर्णय लिया है उसे सही माना जा सकता है चूंकि उमर वहां के हालातों को दूसरे से बेहतर समझते हैं। अगर कोई जबरन ऐसा करने के लिये उतावला हो तो इसकी गंभीरता को समझना चाहिये शायद यही कारण है कि एनडीए में बीजेपी के प्रमुख सहयोगी जेडी-यू के नेता शरद यादव ने भी बीजेपी से अपनी इस योजना को स्थगित करने को कहा है बीजेपी इसे स्थगित करने के मूड में नहीं दिख रही है। भारत के किसी भी भू-भाग पर तिरंगा फहराया जाना भारत के नागरिक होने के नाते किसी के लिए भी फक्र की बात होनी चाहिए। लेकिन क्या व्यक्ति से और व्यक्ति के लिए राष्ट्र है या फिर राष्ट्र से और राष्ट्र के लिए व्यक्ति है? अगर किसी जगह तिरंगा फहराने में कोई सवाल खड़ा हो रहा है तो क्या हमें उसे अपने देश की नाक का सवाल बना देना चाहिए? क्या हमारा लक्ष्य बस यह होना चाहिए कि लाल चौक पर किसी भी तरीके से तिरंगा फहर जाए, भले ही वह कश्मीर के साथ साथ देश की कई जिंदगियों की कीमत पर क्यों न हो?


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