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बात की तीर से निकलती आग में जल रही देश की राजनीति!

रायपुर दिनांक 20 दिसबर।
बात की तीर से निकलती आग
में जल रही देश की राजनीति!
'बातो से मारोंÓ-राजनीति का एक नया रूप इन दिनों सबके सामने है। बस थोड़ी सी चिन्गारी चाहिये, बात की मार ऐसी आग लगाती है कि पूरी राजनीति में उबाल आ जाता है। इस समय वाक युद्व के सबसे बड़े हीरों हैं राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह। जिनके मुंह से निकले तीर कई लोगों को घायल कर गए हैं। अभी कुछ ही दिन पूर्व देश के वित्त मंत्री प्रणव मुकर्जी ने कहा था कि- राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री हो सकते हैं। उनके इस बयान के तुरन्त बाद आस्ट्रेलिया के जासूसी चैनल ने खुलासा किया कि राहुल गांधी ने अमरीकी राजदूत टिमोथी रोमर के साथ हुई बातचीत में हिन्दू कट्टर पंथ को लश्करें तौयबा के आंतकवाद से ज्यादा खतरनाक बताकर एक नई कान्ट्रोवर्सी खड़ी कर दी। हालंाकि विकीलिक्स का यह खुलासा कोई नई बात नहीं थी। नई बात बस इसलिये थी चूंकि यह बात सोनिया गांधी के पुत्र और कांग्रेस द्वारा भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रचारित राहुल गांधी के मुंह से निकली थी। विकीलिक्स के खुलासे के पूर्व केन्दी्रय गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने जब देश में भगवा आतंकवाद का जिक्र किया। तो भी कुछ इसी तरह की हलचल हुई थी। इसके बाद मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह भी इस मामले में भड़कीला बयान देकर कूद पड़े। राजनीतिकारों को एक दूसरे को नीेचा दिखाने के लिये बस मौके की जरूरत होती है। जनता जिसे इन बयानबाजियों से कोई लेना- देना नहीं, सिर्फ मजा लेती है। विकीलिक्स के रहस्योद्घाटन के बाद देशभर में राहुल के खिलाफ मौजूद लोग संगठित हो गये और एक- एक कर उन्होनें हमला बोला जिसमें भाजपा में शामिल होने के लिये कतार में मौजूद उमा भारती, और अन्य कई भाजपा नेताओं के अलावा महाराष्ट्र में शिवसेना के प्रमुख बाल ठाकरे भी शामल हुए। प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी चंूंकि, एक तरह से यह बयान हालांकि एक बंद कमरे में दो प्रमुख हस्तियों के बीच का था लेकिन पूरे एक समुदाय पर प्रहार करने वाला था। बयान देन वाला भी भारतीय राजनीति का एक प्रभावशाली व्यक्ति! विकीलिक्स के रहस्योदूघाटन के बीच कांग्रेस के 125 वें स्थापना दिवस पर राष्ट्रीय महाधिवेशन पर सबकी नजर गई। जहां आंतकवाद और भ्रष्टाचार पर नेताओं के कड़े प्रहार के बीच कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने आरएसएस पर प्रहार कर संपूर्ण देश का ध्यान फिर अपनी आोर आकर्षित करा लिया। इस बार सिंह ने यह कहकर संघ पर प्रहार किया कि वह 'हिटलर की नाजी सेनाÓ की तरह है। इससे पहले सिंह मुम्बई में पाकी हमले पर एटीएस प्रमुख शहीद करकरे के बारे में विवादास्पद बयान देकर चर्चा में आ चुके हैं। राजनीति करने के लिये अपने प्रतिद्वन्दी को किसी न किसी तरह से नीचा दिखाना पड़ता है। इसके लिये अगर ऐसे हथकंडे अख्तियार किये जाये जो संप्रदाय जाति और धर्म के बीच वैमनस्य खड़ा करने का प्रयास किया जाये। तो उसे क्या कहा जाये? अपना स्वार्थ साधने के लिये राजनीति से जुड़े लोग आम जनता की भावनााओं से क्यो खेल रहे हैं? एक तो देश यूं ही गंभीर समस्याओ से जूझ रहा हैं। वहीं राजनीति से जुडे लोग अपनी रोटी सेंकने के लिये नये -नये हथकंडे अपनाकर राजनीतिक निपुणता दिखाने में लगे हैं।

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उम्र कैद की सजा पर से संदेह खत्म! क्या फांसी की सजा पर भी सुको सज्ञान लेगी?

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