बुधवार, 22 दिसंबर 2010

कांग्रेस में बुजुर्गो के दिन लदें! युवा कंधे पर आयेगा भार?

रायपुर बुधवार दिनांक 23 दिसंबर 2010

कांग्रेस में बुजुर्गो के दिन लदें! युवा कंधे पर आयेगा भार?
कांगे्रस ने अपने युवराज राहुल गांधी के ताजपोशी की तैयारियां शुरू कर दी है। हाल ही बीता कांग्रेस का अधिवेशन इस बात का गवाह हो गया कि निकट भविष्य में राहुल गांधी को ही आगे कर संपूर्ण राजनीति का ताना बाना बुना जायेगा। इस अधिवेशन में कांग्रेस अपनी संस्था के पूरे ओवरआइलिंग के मूड में भी दिखाई दी। 125 वें वर्ष पर आयोजित कांग्रेस के अधिवेशन में जिस प्रकार राहुल गांधी को हाईलाइट किया गया तथा युवा फौज को अग्रिम पंक्ति में लाकर खड़ा किया गया। उससे इस बात की संभावना बढ़ गई है, कि बुज़ुर्गो को किनारे कर युवा पीढ़ी को देश चलाने का मौका दिया जायेगा। अगर आगे चलकर ऐसा होता है, तो यह कांग्रेस के लिये पूरे देश में उठ खड़े होने का एक अवसर होगा। वरना आगे आने वाले वर्ष कांग्रेस के लिये दुखदायी होंगे। कांग्रेस के इस अधिवेशन में दिग्विजय सिंह जिस ढंग से मुखर हुए और उन्होंने जो बातें कही- विशेषकर साठ वर्ष से ऊपर के लोगों की राजनीति के बारे में, वह लगता है कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से सिखा- पढ़ाकर दिया गया बयान है। जो यही संकेत दे रहा है कि आगे के दिन कांग्रेस के बुुजुर्गो के लिये अवकाश के हैं। जिस मंजे हुुए राजनीतिज्ञ की तरह राहुल गांधी ने अधिवेशन को संबोधित किया। उसे भी एक संकेत ही कहा जाना चाहिये कि आने वाला वर्ष राहुल गांधी का है। अधिवेशन में शािमल लोगों के मुंह से यह बात भी निकली कि- राहुल, राजीव गांधी की प्रतिछाया है- इससे बड़ा संकेत और क्या हो सकता है? दूसरी सबसे बड़ी बात यह कि लोकसभा में मौजूद अधिकांश युवा चेहरे राहुल को अपना चहेता मानकर उनके नेतृत्व में काम करने की भी बात कर रहे हैं। भारत के युवाओं का एक बहुत बड़ा वर्ग भी राहुल गांधी को अपना आइडल मानकर उसी की राह पर चलने की मंशा ब्यक्त करता रहा है। विभिन्न प्रदेशों में राहुल के चुनावी दौरों में युवा वर्ग की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि वे कितना महत्व रखते हैं, युवाओं के बीच। युवक कांग्रेस के सदस्यता अभियान में संख्या हर बार बढ़ती जाती है। कांग्रेस को अब अगर देश में अपनी साख बनानी है, तो उसे वास्तव में साठ वर्ष या उससे आगे का मोह छोड़कर एक नई रणनीति के तहत काम करना होगा। कांग्रेस के अधिवेशन में यह बात स्पष्ट हो गई है कि- सोनिया गांधी प्रधानमंत्री का पद नहीं लेंगी। बल्कि वे वर्तमान स्थिति में संगठन का नेतृत्व करती रहेंगी। राहुल गांधी और संपूर्ण अधिवेशन में प्रमुख नेताओं ने जिस प्रकार राहुल गांधी को विकीलिक्स खुलासे से उत्पन्न स्थिति से बचाकर निकाला। उसे भी कांंग्रेस की परिपक्व रणनीति का द्योतक कहा जाना चाहिये। विपक्ष में कांग्रेस की इस नई पहल से हड़कम्प होना स्वाभाविक है और वे भी यह अच्छी तरह से जानते हैं कि आने वाले समय में कांग्रेस राहुल को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने का भरपूर प्रयास करेगी। विपक्ष के लिये कांग्रेस द्वारा निर्मित होने वाले इस तूफान को रोक पाना कठिन ही लगता है। इस स्थिति से निपटने के लिये विपक्ष को चाहे वह भाजपा हो या अन्य कोई भी पार्टी, एक बहुत कठिन दौर से गुजरना पड़ सकता है। इसकी ऐहतियाती पहल फिलहाल तो विपक्ष के पास यही है कि वह राहुल गांधी के लूप होल को किसी न किसी तरह उजागर कर उनकी छवि को जनता के सामने कमजोर करे। इसकी पहल विकीलिक्स खुलासे के बाद जरूर हुआ किंतु इसमें कोई खास सफलता हासिल नहीं हो सकी। अगर विपक्ष इस मामले में इस रणनीति पर चल रहा है कि वह इसको चुनाव के दौरान भुनाने का प्रयास करेगा तो इसमें भी उसको कोई फायदा नहीं होने वाला। क्योंकि हमारे देश में लोगों को जल्द ही भूल जाने की आदत है.... !