रविवार, 14 नवंबर 2010

खूब चिल्लाओं बाबाजी... भ्रष्टाचारियों पर नहीं पडऩे वाला कोई असर...!

खूब चिल्लाओं बाबाजी... भ्रष्टाचारियों
पर नहीं पडऩे वाला कोई असर...!
रामदेव बाबाजी,अन्ना हजारे ,स्वामी अग्रिवेश और किरण बेदी जी-आप सभी महानुभाओं से हमारा सिर्फ एक ही सवाल-आपने रविवार को दिल्ली के जंतर मंतर में चिल्ला चिल्लाकर कहा कि- देश में हजारों करोड़ रूपये का भ्रष्टाचार हुआ। क्या इसका कोई हल निकल सकता है? हर कोई यह जानता है कि देश पांच वर्ष के बजट से भी ज्यादा राशि के भ्रष्टाचार में आंकठ डूबा है। जो सत्ता में है, वह भी और जो सत्ता में नहीं, वह भी। आप जैसे चंद ईमानदार लोगों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाकर आम लोगों में अलख जगाई उसके लिये आप बधाई के पात्र है। किंतु क्या इससे कोई फायदा होगा? आपने चिल्लाया, जनता ने सुना, सरकार ने भी सुना, विपक्ष ने भी सुना...और सबने सुना और सुनकर सब भूल गये कि- आपने क्या कहा। यह जो भूलने की प्रवृति है, इसी ने आज देश को भ्रष्ट तंत्र के हवाले कर दिया। हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की दुहाई देते हैं। अमरीका जैसा विश्व शक्तिमान भी हमारी तारीफ करता है किंतु जिस तंत्र में हम सांस ले रहे हैं। उसमें हमें भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने या कहें जैसा आप लोगों ने जंतर मंतर में चिल्लाया। उस ढंग की तो आजादी है लेकिन किसी की गिरेबान पकड़कर यह पूछने का अधिकार नहीं है कि आपने देश का पैसा क्यों चुराया? तुम्हें इसका अधिकार किसने दिया कि हमारे खरे पसीने की कमाई को तुम यूं ही अपने परिवार को मोटा ताजा करने के लिये लगाओ। बाबा रामदेव सहित सभी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों का पूर्ण सम्मान व अभिनंदन करते हुए कहना चाहते हैं कि जब तक हम देश में कठोर से कठोर कानून नहीं बनाएंगे। ऐसे भ्रष्टाचारी देश की सत्ता में काबिज होते रहेंगे। सारी व्यवस्था में परिवर्तन करने की जरूरत है। आज राजनीति जहां भ्रष्टाचार की गर्त में आंकठ डूब गई है। वहीं उसके द्वारा चलाया जा रहा सरकारी तंत्र भी आंकठ भ्रष्टाचार में डूब गया है। विकास कार्यो और गरीबों को परोसने के लिये दिये जाने वाले अनाज में तक रिश्वतखोरी की बू आने लगी है। घर में बच्चा पैदा होता है तो उसे भी पैदा करने के लिये अस्पताल को घूस देनी पड़ती है। तब कहीं जाकर मां के पेट से चीर- फाड़ किये बगैर शिशु जन्म लेता है। कैसी दुर्दशा में हम जी रहे हैं। बाबा रामदेव ने चुनाव के दौरान कहा था कि- स्विस बैंक से पैसा निकलवाने में वे अहम भूमिका निभायेंगें। हम पूछना चाहते हैं कि वे कितना पैसा स्विस बैंक से निकलवा सके? इस पांच वर्ष के दौरान देश का अरबों रूपये जो आम गरीब के पसीने से निकलता है नेता, मंत्री और अधिकारी मिल जुलकर खा गये। खेल को तक नहीं छोड़ा उसको भी चबा डाले। फिर भी जापान या अन्य किसी देश की तरह किसी दोषी को फांसी पर लटकाया नहीं गया। सब स्वतंत्र घूम रहे हैं। कोई विदेश में बैठा ललकार रहा है कि- आ तुझ में हिम्मत है तो मेरा बाल बांका कर ले तो कोई सार्वजनिक मंच पर खिलखिलाकर हमारी खिल्ली उड़ा रहा है कि- देख तेरा पैसा हम कैसे खा गये-तूने हमारा क्या बिगाड़ लिया। बाबाजी आप और आपके साथियों ने समाज को सुधारने के लिये जिस डगर को पकड़ा है। उसकी आगे की डगर बहुत कठिन है। फिर भी हम आपके हिम्मत की दाद देते हैं कि कहीं किसी ने कुछ तो पहल की।