शुक्रवार, 29 अक्तूबर 2010

मौत की सामग्री से दहली राजधानी? कौन रच रहा है षडय़ंत्र!

रायपुर दिनांक 1 नवंबर 2010

मौत की सामग्री से दहली राजधानी? कौन रच रहा है षडय़ंत्र!
राज्य गठन की वर्षगांठ से ठीक एक दिन पूर्व रविवार को रायपुर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विस्फोट की अवाज से गूंज उठा। करीब डेढ किलोमीटर का पूरा क्षेत्र दहशत में आ गया। रिहायशी इलाके की बिल्डिंगे हिल गईं। आसपास खड़ी कारों के कांच टूट गये तथा घरों के शीशे सर्वत्र बिखर गये। विस्फोट कचरे के ढेर में पड़े डिब्बों में हुआ जिसमें डेटोनेटर वाले बम थे, जो तारों के गुच्छे व अन्य रासायनिक तत्वों से बने थे। पुलिस के आला अफसरों ने घटना का मुआयना करने के बाद इस संबंध में जो बयान दिया वह कुछ इस प्रकार था-''दीवाली का समय है, किसी ने कचरे में फे के गए विस्फोट में आग लगा दी यह बयान रायपुर में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिये काफी है। वह भी उस समय जब रायपुर में राज्योत्सव चल रहा है, दीवाली की तैयारी चल रही है, और कई महत्वपूर्ण हस्तियां आना जाना कर रही हैं। ऐसे समय शहर को दहला देने वाले विस्फोट पर गैर जिम्मेदाराना बयान ने यह बता दिया है कि पुलिस किसी मामले को गंभीरता से लेना ही नहीं चाहती। इस घटना के बाद शहर को एलर्ट कर दिया गया है किंतु अब तक इस मामले में किसी की जवाबदारी तय नहीं की गई है। रायपुर में राज्य निर्माण दिन 1 नवंबर से ठीक एक दिन पहले हुए इस विस्फोट ने सभी को यह सोचने के लिये विवश कर दिया है कि आखिर इस शांत शहर के शांत वातावरण को बिगाडऩे का प्रयास कौन कर रहा है? राजधानी के आसपास नक्सली हलचल किसी से छिपी नहीं है- धमतरी,महासमुन्द, सरायपाली, कसडोल क्षेत्र में नक्सलियों की सक्रियता स्वयं पुलिस के आला अफसर करते हैं। नक्सली रायपुर के विधायक विश्राम गृह तक में पर्चे लगाकर जा चुके हैं। शहर में कुछ महीने पूर्व भारी मात्रा में अग्रेयास्त्र और विस्फोटक सामग्रियां बरमाद हो चुक ी है। अभी कुछ दिन पूर्व ही पुलिस ने दावा किया था कि उसने रायपुर में स्िरक्रय डॉन ग्रुप को नेस्तानबूत कर दिया है। कुछ लड़कों को पहले पकड़ा गया था, उनके बारे में बताया गया कि वे नहीं है। उसके बाद कुछ नये लोगों को पकड़कर नये पुुलिस वालों ने बताया कि 'यही है ंवे अपराधीÓ आखिर इस दावे के बाद भी राजधानी में हो रहे सीरियल विस्फोटों में किसका हाथ है? क्या फरिश्ता काम्पलेक्स के पास हुए इस प्रभावशाली विस्फोट को यूं ही मामूूली दीवाली के कचरे का विस्फोट मानकर हवा में उड़ा दिया जाए? जबकि रायपुर में पिछले रिकार्ड को खंगाला जाये तो स्पष्ट है कि भाजपा कार्यालय के सामने बस में हुए विस्फोटों से जो शुरूआत हुई वह अब भी जारी है । इस विस्फोट के बाद बूढ़ा तालाब में सीमेंट के बैंच पर, विवेकानंद उद्यान के पास जहां एक बच्चा घायल हुआ। होली क्रास स्कूल गेट पर जहां भारी विस्फोट के बाद स्कूल के कमरों के शीशे फूटे और अब रजबंधा मेैदान क्षेत्र में ट्रांसफार्मर के पास कचरे के ढेर में तार के साथ डेटोनेटर से विस्फोट किसकी वारदात है, और कौन इस षडय़ंत्र में शामिल हैं? रायपुर में पुलिस किसकी सुरक्षा कर रही है? लालबत्ती लगे मंत्रियों के काफिले को आगे बढ़ाने के लिये सड़कों से आम इंसान को जानवरों की तरह हंकालने वाली पुलिस का बस यही काम रह गया है? क्यों वह आम आदमी की सुरक्षा के प्रति लापरवाह है। यह घटना कोई मामूली घटना नहीं है, उसे इसके पीछे गहराई से जाने की जरूरत है। खोज निकालना है कि राजधानी को दहलाने का षडयंत्र आखिर कौन रच रहा है? रविवार को विस्फोट ने संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। अपनी नाक बचाने के लिये एक उच्च पदस्थ अधिकारी का यह बयान कि दीवाली का समय है, किसी ने कचरे में विस्फोटक डाल दिया। जबकि दीवाली के पटाखे अभी फूटे भी नहीं और न ही पटाखोंं का कचरा बना। आखिर पुलिस हकीकत क्यों बयान नहीं करती? क्यों सारे मामले को उलझाकर सरकार व जनता को गुमराह करने का प्रयास करती है? विस्फोटक सामग्री किसने यहां रखी? क्या यह उसी डॉन ग्रुुप का है जिसका अभी तक कोई पता नहीं या फिर नक्सलियों के किसी आतंकी कार्रवाई के लिये एकत्रित की गई मौत की सामग्री।