शनिवार, 23 अक्तूबर 2010

कालिख पर सफेदी का प्रयास-बिल्ली दूध पी गई,सब देखते ही रह गये!

रायपुर दिनांक 23अक्टूबर 2010
कालिख पर सफेदी का प्रयास-बिल्ली
दूध पी गई,सब देखते ही रह गये!
कांग्रेस अब सामी के मुंह के कालिख को सफेद करने में लगी है। इसके लिये स्थानीय नेता कभी कुछ तो कभी कुछ बयान देने में लगे हैं। इसमें दो मत नहीं कि इस पूरे कांड में किसी बड़ी हस्ती का हाथ है। वह कौन है? इसका खुलासा करने की जगह कांग्रेस के सम्माननीय नेता मामले को और उलझाने में लगे हैं। यह लगभग सभी बड़े कांग्रेसियों को मालूम है कि किसने इस शर्मनाक घटना को जन्म दिया, लेकिन गुटबाजी में लिप्त प्राय: सभी नेता इस मामले में एक हो गये हैं। उनके मुंह से या तो नाम निकल नहीं रहा या वे खामोश आगे के एपीसोड़ का इंतजार कर रहे हैं। इस पूरे कांड में लिप्त आरोपियों ने जो खुलासा किया उसमें छोटे शिकारी ही प्रकाश में आये हैं। असल जो हैं वह या तो इस पूरे कांड की निंदा करने में लगे हैं या जांच की मांग करते हुए भीड़ में शामिल हो गये तथा तमाशे को और रोचक बनाने में लगे हैं। रायपुर में कांग्रेस का पुराना इतिहास देखा जाये तो यहां बहुत से कांड कांग्रेस भवन या बाहर हुए हैं। जो कांग्रेस के असली चेहरे को उजागर करती रही है। बिल्ली के बारे में एक बात प्रसिद्व है वह जब दूध पीती है तो आंखे बंद कर लेती है। इससे उसे ऐसा अहसास होता है कि वह जो कर रही है उसे कोई देख नहीं रहा। हममें से बहुत से लोगों ने कांग्रेस की कई हस्तियों को ऐसे कारनामें करते देखा है, जिसे अन्य लोग भी जानते हैं किंतु उसे हमेशा पर्दे में ही रहने दिया गया। असल में कांगे्रस इस कांड के बाद छत्तीसगढ़ में जो छबि खराब कर चुकी है, उसे सुधारने के लिये यह जरूरी है कि इस पूरे कांड में जो लोग भी इनवोल्व हैं उन्हें पूरी तरह से बेनकाब करें। ताकि कांग्र्रेस प्रदेश में अपना वजूद फिर से स्थापित कर सके। पार्टी के अंदर जितने भी ऐसे तत्व हैं, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाये। हम यह नहीं कहते कि यह बीमारी सिर्फ कांग्रेस के अंदर है। भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दलों में भी इस ढंग के लोगों की मौजूदगी किसी से छिपी नहीं हैं। ऐसे नेता अपने प्रतिद्विन्दी को नीचा दिखाने के लिये किसी भी हद तक जा सकते हैं-ऐसे नेताओं की ही करनी का परिणाम है- सामी के मुंह पर कालिख। अगर घर के अंदर घुसकर आपके मुंह पर कोई कालिख पोतकर चला जाये तो पुलिस क्या करें? कांग्रेसी इस समय यही चिल्ला रहे हैं कि सरकार ने सामी की सुरक्षा का इंतजाम नहीं किया। अगर मान लें सरकार सुरक्षा का इंतजाम करती भी तो क्या यह वारदात नहीं होती? सामी कांग्रेस भवन में अपने परिवार अर्थात कांग्रेसियों की बैठक में थे। यहां उनके ही सदस्यों के कहने पर कुछ पैसे की लालच रखने वालों ने यह कृत्य कर दिया, तो इसमें सुरक्षा व्यवस्था क्या करती? अगर सुरक्षा में लगे पुलिसवाले ऐसे माहौल में कांग्रेस भवन या भाजपा कार्यालय में उस समय घुस जाते, तो वही एक हंगामे का कारण बन जाता। यह किसी नेता को बताने की जरूरत नही,ऐसा होता आया है। नेताओं को हमारा सुझाव है कि वे ऐसा ही काम करें, जो आम जनता के गले उतरे। उसे पहले जैसा बेवकूफ न समझे वह पढ़- लिख गया है और समझदार भी हो गया है। राजनीति करने वाले सभी को यह बात अब समझ लेनी चाहिये कि वह आम लोगों को अपनी तिकड़मबाजी से गुमराह नहीं कर सकते। सामी के मुंह पर कालिख पुती, इससे रायपुर शहर सहित पूरा छत्तीसगढ शर्मसार है। एक अतिथि का हमने अनादर किया है। इसका खामियाजा उन सच्चे कांग्रेसियों को ऐसे व्यक्ति का नाम सामने लाकर करना चाहिये। फिर चाहे वह कितना ही बड़ा ओहदा या प्रभावशाली व्यक्तित्व क्यों न रखता हो। हम यह भी जानते हैं कि ऐसा जो भी व्यक्ति इस कांड में लिप्त है, उसका भेद खुलने पर वह कहीं का न रह जायेगा। उसका राजनैतिक कैरियर सदैव के लिये खत्म हो जायेगा, लेकिन अगर किसी में भी देश के स्वस्थ प्रजातांत्रिक व्यवस्था की चाह है, तो उन्हें ऐसे लोगों को बिना किसी हिचक के बेनकाब करना चाहिये।