एशिया की धरती पर कामनवेल्थ गैम्स

रायपुर दिनांक 3 अक्टूबी 2010

एशिया की धरती पर कामनवेल्थ गैम्स,
भारत की आर्थिक ताकत मजबूत हुई!
रविवार से कामनवेल्थ गैम्स शुरू हो रहे हैं। यह आयोजन दिल्ली में हो या कनाडा के हेमिल्टन में, इस मुकाबले में दिल्ली की विजय हुई थी ऐसा लगता है कि दिल्ली में कामनवेल्थ गैम्स खूब विवादों में रहने के बावजूद भाग्यशाली रहा कि उसका आयोजन समय पर हो रहा है। कामनवेल्थ तैयारियों के दौरान आयोजकों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे तो हाल ही करोड़ों रूपये में बना फुट ब्रिज भी टूट कर गिर गया, जिसे सेना की मदद से बनाना पड़ा। खेलगांव में सफाई व्यवस्था और अन्य अनेक मुद्दे सदैव चर्चा के विषय रहे। आतंक के साये में आयोजित होने वाले इस खेल पर पहले प्रश्न चिन्ह जामा मस्जिद के पास आतंकवादियों द्वारा अंधाधुन्ध फ़ायरिंग से लगा। तभी अयोध्या पर फैसले से तो विश्व यही समझ बैठा कि शायद अब कामनवेल्थ गैम्स टल जायेगा। अयोध्या फैसले पर सारा देश शांत रहा तो एक और खबर कामनवेल्थ गैम्स से आई कि चीफ मेडिकल आफीसर बीमार पड़ गये हैं। चीफ मेडिकल ऑफिसर को टाइफाइड हो गया है। दूसरे मेडिकल आफिसर को लगाकर यह मसला हल कर लिया गया। टाइफाइड खाने- पीने की गड़बड़ी से फैलने वाली बीमारी है और भारत में यह बहुत आम है। दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों में हिस्सा लेने वाले खिलाडिय़ों को खास हिदायत दी गई है कि वह खाने- पीने में बहुत सावधानी बरतें। 2010 के कॉमनवेल्थ खेलों की मेजबानी तय करने के लिए नवंबर 2003 में जमाइका के मोंटेगो शहर में कॉमनवेल्थ खेल संघ की आम सभा में मतदान हुआ। तो उस समय आमने- सामने थे दिल्ली और हैमिल्टन। दिल्ली को 46 वोट मिले जबकि 22 वोटों के साथ हैमिल्टन काफी पीछे रह गया। भारत के हैदराबाद शहर में 2003 में हुए अफ़्रो एशियाई खेलों की कामयाबी ने भी मेजबानी के रुख को भारत के पक्ष में मोड़ा। पूर्व खेल मंत्री अय्यर ने जुलाई में राज्यसभा में दावा किया था कि भारत ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा जैसे देशों को एक- एक लाख डॉलर दिए। ताकि दिल्ली को खेलों की मेजबानी मिल सके। अय्यर कहते हैं कि इन देशों को खेलों की तैयारी के लिए पैसे देने की जरूरत नही थी। उनके मुताबिक, कानून चाहे जो कहे, लेकिन मैं तो इसे रिश्वत ही कहूँगा। हालांकि अय्यर के इन संगीन आरोपों को न्यूजीलैंड की ओलंपिक समिति ने सिरे से खारिज किया। उसने यह तो माना कि कॉमनवेल्थ खेलों की मेजबानी हासिल करने की प्रक्रिया के दौरान भारत से उसे पैसा मिला, लेकिन वह इसे रिश्वत नहीं मानते बल्कि यह रकम तो हर मेजबान देश को खेलों में हिस्सा लेने वाले देशों को देनी होती है। दिल्ली एशिया का दूसरा शहर है जिसे कॉमनवेल्थ खेलों की मेजबानी मिली। इससे पहले 1998 में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में कॉमनवेल्थ खेल हो चुके हैं। 1982 के एशियाई खेलों के बाद कॉमनवेल्थ खेल दिल्ली में होने वाला सबसे बड़ा खेल आयोजन है। यह आर्थिक तौर पर उभरते भारत के लिए अपनी ताकत दिखाने का मौका है। एशियाई खेल सफलतापूर्वक हो, इसकी अब हम कामना कर सकते हैं।

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