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पाक से चौथे पूर्ण युद्व के बादल मंडराने लगे!

रायपुर दिनांक 18 सितंबर 2010
पाक से चौथे पूर्ण युद्घ
के बादल मंडराने लगे!
उन तीस- ग्यारह जैसा हमला, भगवान न करें -अब भारत के किसी शहर में हो, अगर हुआ तो इसके भयंकर परिणाम निकल सकते हैं, शायद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्घ ही छिड़ जायें। पाक में आतंकवादियों की तैयारियाँ और भारत को मिल रहे गुप्त संदेश इस संभावना को बल दे रहे हैं। कश्मीर में लगातार हिंसक गतिविधियाँ और चीन की पाक अधिकृत कश्मीर में हलचल तथा श्रीलंका में बंदरगाह बनाने की योजना ने भारत को बाध्य कर दिया है कि वह किसी भी मुकाबले के लिये तैयार रहे। पाक जहां आंतकी चाल से भारत को अशांत करने में लगा है वहीं चीन ने भारत के सारे पड़ोसी देशों नेपाल, पाकिस्तान, बंग्लादेश, श्रीलंका,म्यामार को किसी न किसी प्रकार से मदद पहुँचाकर अपनी मुट्ठी में कर लिया है। उसकी सबसे खतरनाक पहल पाक अधिकृत कश्मीर में निर्माण कार्यो के नाम पर घुसपैठ है। पाक के हौसले चीन की मदद के कारण बुलंदी पर हैं और पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी शिविर पाक की शह पर चल रहे हैं। इन परिस्थितियों में अब भारत उन तीस- ग्यारह जैसे किसी भी हमले को सहन करने की स्थिति में नहीं होगा। भारत और पाक के बीच संबंध लगातार बिगड़ते जा रहे हैं इसके पीछे पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों के अलावा कश्मीर को अशांत करने के लिये वहां की जनता को भड़काने का काम भी एक कारण है। कश्मीर में हुए प्रदर्शनों में पाकिस्तानी झंडों का फहराना इस बात का पक्का सबूत है कि पाकिस्तानियों का कश्मीर को अशांत करने में हाथ है। मुंबई पर हुए भीषण आतंकवादी हमले की तरह किसी अन्य हमले की सूरत में इस बात की पूरी संभावना है कि भारत आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों को नष्ट करने के लिए सीमापार हमला कर सकता है जो भारत पाक के बीच 'पूर्ण युद्धÓ में बदल सकता है। इस युद्ध में परमाणु हथियारों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अमेरिका के आतंकवाद रोधी रणनीतिक विशेषज्ञ पीटर बर्गेन ने कहा है कि यह गंभीर चिंता का विषय है और हम सभी को इसके लिए चिंतित होना चाहिए।

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उम्र कैद की सजा पर से संदेह खत्म! क्या फांसी की सजा पर भी सुको सज्ञान लेगी?

याकूब मेनन को फांसी  से पहले व बाद से यह बहस का विषय है कि फांसी दी जानी चाहिये या नहीं अभी भी इसपर बहस जारी है लेकिन इस बीच उम्र कैद का मामला भी सुर्खियों में है कि आखिर उम्र कैद होती है, तो कितने साल की? यह माना जाता रहा है कि उम्र कैद का मतलब है- चौदह साल जेल लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि उम्र कैद चौदह साल नहीं बल्कि ताउम्र है याने अपराधी की जब तक जिंदगी है तब तक उसे जेल में ही काटनी होगी. छत्तीसगढ के धीरज कुमार, शैलेन्द्र और तीन दोषियों के मामले में याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और वी गोपाला गोवड़ा की बेंच ने समाज के एक वर्ग द्वारा फांसी की सजा के विरूद्व अभियान पर टिप्पणी करते हुए कहा की यह वर्ग चाहता है कि फांसी को खत्म कर उसकी जगह आजीवन कारावास की सजा दी जाये तथा स्पष्ट किया कि उम्र कैद का मतलब उम्र कैद होता है न कि चौदह साल. अपराधी जिसे उम्र कैद हुई है उसे अपनी पूरी उम्र सलाखों के पीछे बितानी होगी. इससे यह तो संकेत मिलता है कि भविष्य में फांसी को खत्म करने पर भी विचार किया जा सकता है. सर्वोच्च अदालत ने अब तक उम्र कैद के संबन्ध में चली…

काले धूल के राक्षसों का उत्पात...क्यों खामोश है प्रशासन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के औद्योगिक क्षेत्रों-उरला, सिलतरा, सोनढोंगरी,भनपुरी से निकलने वाली काली रासायनिक धूल ने पूरे शहर को अपनी जकड़  में ले लिया है .यह धूल आस्ट्रेलिया के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाली धूल से 18 हजार गुना ज्यादा है.
यहां करीब तीन दर्जन उद्योग ऐसे हैं जो चौबीसों घंटे धूल भरी आंधी उगल रहे हैंं ,जिसपर किसी का कोई नियंत्रण नहीं ह्रै. नियंत्रण है तो भी वह कुछ दिनों में छूटकर आसमान और धरती दोनों पर कब्जा कर लेते हैं.
चौकाने वाली बात यह है कि वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है. यह संख्या चीन से ज्यादा है.प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण से जहां 1640 लोगों की मौत के मुकाबले चीन में वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या (1620 ) ज्यादा है. यह आंकड़े हम यहां इसलिये पेश कर रहे हैं ताकि रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये इसपर नियंत्रण पाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये. वायूु प्रदूषण के बगैर स्मार्ट सिटी,डिजिटल सिटी बनाने का सपना पूरा हो पाना कठिन है. आज स्थिति यह है कि एक स्थान पर कालेधूल को हटाया जाता है तो शहर का दूसरा भाग कालिख पुतवा लेत…

ऊची दुकान फीके पकवान!

रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर 2010

ऊँची दुकान फीके पक वान!
कभी बच्चो को परोसे जाने वाला मध्यान्ह भोजन तो कभी होटल, रेस्टोरेंट से खरीदी गई खाने की सामग्री तो कभी किसी समारोह में वितरित होने वाले भोजन के जहरीले होने और उसको खाने से लोगों के बीमार पडऩे की बात आम हो गई हैं। अभी बीते सप्ताह शनिवार को नई राजधानी में सड़क निर्माण कंपनी के मेस का खाना खाकर कई मजदूर बीमार हो गये। कइयों की हालत गंभीर थी। मेस को हैदराबाद की बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी चला रही थी। सबसे पहला सवाल यह उठता है कि जब कोई कंपनी या समारोह में इतने व्यक्तियों का खाना एक साथ पकता है उसे लोगों में बांटने के पहले जांच क्यों नहीं होती? खाना बनाने से पहले यह क्यों नहीं देखा जाता कि जहां खाना बनाया जा रहा है वहां का वातावरण पूर्ण साफ सुथरा है या नहीं। स्कूलों में बच्चों को वितरित होने वाले मध्यान्ह भोजन में भी कुछ इसी तरह का होता आ रहा है। बच्चो को जो खाना बनाने के लिये कच्चा माल पहुँचता है उसका उपयोग करने से पहले उसकी सही जांच पड़ताल नहीं होती फलत: उसमें कीड़े मकोड़े व अन्य जीव जन्तु भी मिल जाते हैं। अक्सर समारोह व शादी …