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हाकी के बढते कदम पर

हाकी के बढते कदम पर
यौन शोषण का ब्रेक?
खेल और खिलाड़ी...कोच और अधिकारी, इसमें राजनीतिज्ञों की दखलंदाजी...अब इस पर सोचने का समय आ गया है। दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। इस बीच भारतीय महिला हाकी टीम में उठे विवाद ने संपूर्ण विश्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। खेलों के प्रति महिलाओं के आकर्षण को भी इस विवाद से धक्का लगा है। भारतीय महिला टीम की कतिपय खिलाडिय़ों ने अपने कोच और वीडियोग्राफर पर यौन शोषण के जो गंभीर आरोप लगाये हैं। उसके परिप्रक्ष्य में देश में महिलाओं को खेल में उतारने से पूर्व अब परिवार जनों को दस बार सोचना पड़ेगा कि क्या इससे उनका भविष्य संवरेगा या उनकी बर्बादी। हम उडऩपरी पीटी उषा के बयान से यह मान सकते हैं कि पहले खेल को खेल भावना से देखा जाता था। उनका कथन है कि उनके समय में इस प्रकार की कोई बात नहीं हुई और वे हाकी के बारे में सुनकर आश्चर्यचकित हैं, किन्तु भारोत्तोलक कर्णम मल्लेश्वरी का बयान यह इंगित कर रहा है कि हाकी को सम्हाले रखने का बीड़ा उठाने वालों का नैतिक व चारित्रिक स्तर दोनों काफी गिर चुका है। कर्णम मल्लेश्चरी कहती है हाकी के चारित्रिक पतन का जो रहस्योद्घाटन किया गया है वह शर्मनाक है। उनके अनुसार कोच ही नहीं अधिकारी भी इस मामले में शमिल हैं। जबकि पूर्व ओलपिंक हाकी खिलाड़ी असलम शेर खान ने तो संपूर्ण व्यवस्था पर ही उंगली उठाई है। वे कहते हैं कि किसी एक को बलि का बकरा बनाने की जगह संपूर्ण मामले की तह तक जाने की जरूरत है। वीडियोग्राफर की एक तस्वीर मिलने से एक मामला उजागर हुआ, ऐसे कितने ही मामले दबे पड़े हैं। चारित्रिक हनन का खेल कई सालों से चल रहा है और विरोध की हिम्मत किसी में नहीं है। इसमें भारतीय ओलंपिक संघ, भारतीय खेल प्राधिकरण और खेलों में दखल देने वाले नेता शामिल हैं। असलम शेर खान के इस बयान के बाद तो यह स्पष्ट हो चुका है कि हमें इस पूरे एपीसोड़ पर अब नये सिरे से विचार करने की जरूरत हैं। आईपीएल में आर्थिक घोटाले और भारतीय हाकी में यौन शोषण का मामला उजागर होने के बाद देश में एक तरह से खेलों में अपने बच्चों को आगे बढ़ाने के मामले में एक ब्रेक लग गया है। चूंकि हमारी संस्कृति और परंपराएं इन सबकी इजाजत नहीं देती। विदेशों में यह आम बात है लेकिन भारत में इस तरह का व्यवहार कोई बर्दाश्त करने के लिये तैयार नहीं। भारतीय हाकी संघ के पूर्ण ओवआइलिंग की जरूरत है। सबसे पहले तो अगर महिला हाकी टीम को एक नया मोड़ देना है,तो इसका सारा दायित्व महिला सीनियर खिलाडिय़ों के जिम्मे करना होगा। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह कि खेल को चाहे वह कोई भी खेल हो राजनीतिज्ञों के हस्तक्षेप से दूर रखने की जरूरत है। खेल में राजनीति घुसने का अर्थ है कि योग्य और प्रतिभावान खिलाडिय़ों को दरकिनार रखना और अपने चमचों को महत्व देना। भ्रष्टाचार, यौन शोषण और अन्य अनेक बुराइयों की जड़ में अगर हम राजनीति के घुसपैठ को कारण गिनाये तो यह गलत नहीं होगा।

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रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर 2010

ऊँची दुकान फीके पक वान!
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