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स्पेन फुटबाल का विश्व विजेता

रायपुर सोमवार
दिनांक 12 जुलाई 2010
स्पेन फुटबाल का विश्व विजेता
लेकिन इस क्षेत्र में हम कहां?
खेल की दुनिया में एक मीठा एहसास!- स्पेन फुटबाल का विश्व चैम्पियन बन गया। यह इसलिये भी महत्वपूर्ण है चूंकि स्पेन ने अब तक दूसरे देशों के एकाधिकार को खत्म कर दिया। स्पेन के जीतने की भविष्यवाणी बहुत पहले हो गई थी। इस बार पहली बार भविष्यवाणी के लिये एक जीव का प्रयोग किया गया। जो सदैव मैचों के बारे में सही भविष्यवाणियां करता रहा। इसलिये भी यह मैच सदा - सदा के लिये याद किया जायेगा। स्पेन ने नीदरलैण्ड की टीम को एक शून्य से पराजित कर विश्व विजेता का ताज अपने सिर बांधा है। इसके लिये उसे एक दशमलव उनचालीस अरब रूपये का पुरस्कार प्राप्त होगा,जो शायद विश्व में खेले जाने वाले किसी खेल का सबसे बड़ा पुरस्कार है। जोहन्सबर्ग साँकरसिटी स्टेडियम में खेले गये इस रोमांचक मैच की विशेषता यह रही कि इसमें लेजर रेज के जरिए फुटबाल कौशल का शानदार प्रदर्शन किया गया। फीफा वल्ड कप ट्राफ ी पर अब स्पेन का कब्जा है। स्पेन ने पूरी प्रतियोगिता में सिर्फ एक ही बार पराजय का सामना किया। जब उसे गु्रप मैच में स्विटजरलैण्ड ने शून्य एक से हराया जबकि गु्रप मैच में ही उसे चिली से एक गोल खाना पड़ा लेकिन यहां भी उसे दो शून्य से विजय हासिल हुई। स्पेन को फायनल तक पहुंचने में कठिन दौर से गुजरना पड़ा। एक से एक तगड़ी टीम से उसका मुकाबला था। इसका अंदाज इसी से लगता है कि स्पेन ने प्रायरू हर मैच एक शून्य या दो शून्य से ही जीता। वल्ड कप का अगला मुकाबला ब्राजील में सन् 2014 में होगा। इस विश्व कप को सदा क्रिकेट को झूमकर देखने वाले करोड़ों भारतीय दर्शकों ने भी मजा लेकर देखा। शर्त व सट्टे का बाजार भी गर्म रहा। करोड़ों रूपये का सट्टा भी लगा होगा लेकिन भारतीय दर्शकों को इस बात का मलाल रहा होगा कि इस प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन में हमारी कोई टीम कहीं नजर नहीं आई। भारत , हाकी और क्रिकेट का विश्व विजेता रहा है। हमने एथलेटिक और पहलवानी में भी विश्व विजेता होने का गौरव पाया है-हम क्यों नहीं विश्व कप फुटबाल में भाग नहीं ले पा रहे हैं? इस पर हमारे खेल विशेषज्ञों व खिलाडिय़ों को चिंतन करने की जरूरत है। विश्व जिस खेल को देखने के लिये उमड़ पड़ता है। उसके प्रति हमारे देश में इतनी नीरसता क्यों? क्यों हम अपने खिलाडिय़ों को इसके लिये तैयार नहीं कर पा रहे हैं। असल बात यह है कि क्रिके ट को छोड़कर हम किसी और खेल के प्रति दिलचस्पी ही नहीं ले रहे हैं। स्पेन जैसा एक छोटा सा राष्ट्र आज फुटबाल का विश्व विजेता हैं, और हम जो परंपरागत ढंग से फुटबाल खेलते आये हैं। आज आजादी के बासठ वर्षाे बाद भी एक अरब से ज्यादा की आबादी वाले देश से एक ऐसी फुटबाल टीम नहीं तैयार कर सके जो विश्व की टीमों के समक्ष खड़े होकर क्वालीफाई तक नहीं कर सक पा रहे हैं। हम फुटबाल की बात को छोड़ भी दें तो हमारी स्थिति हाकी में भी कुछ ऐसी ही है। एक बार विश्व विजेता होने का अहम हमारे लोगों में बैठ गया और उसके बाद एक भी बार हम न विश्व विजेता बन पाये और न आयोजित होने वाली किसी प्रतियोगिता को क्वालीफाई कर पाये। देश के हाकी खिलाडिय़ों की बदतर स्थिति है। फुटबाल और हाकी को न कोई महत्व देता है और न उसके खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित किया जाता है। खिलाड़ी बदतर हालत में जिंदगी बसर करते हैं। बहरहाल , हम अपने दुखड़े पर किसी और समय रोयेंगे। फिलहाल, एक यूरोपीय देश के विश्व विजेता बनने पर उसे बधाई देकर उसकी खुशी में शरीक होते हैं।

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