सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

छत्तीसगढ़ के आपराधिक बाजार में

रायपुर रविवार। दिनांक 8 अगस्त 2010


छत्तीसगढ़ के आपराधिक बाजार में
पक रहे हैं कई प्रकार के व्यंजन!
छत्तीसगढ़ का आपराधिक बाजार इन दिनों विभिन्न किस्म के आपराधिक व्यंजनों से भरा पड़ा हैं यहां आपकों हर किस्म के व्यंजन बिना पैसे दिये मिल जायेंगे हां आपने खुद अपनी सुरक्षा कर ली तो यह आपका भाग्य वरना खुद तो लुट जाओगे पूरे परिवार को भी मुसीबत में डाल दोगें। इस बाजार में आपकों सड़क पर चलते चलते ही कोई ऐसा मिल जायेगा जो आपके गले से चैन छीन ले,हाथ में रखा रूपयों से भरा बैग छीन ले। घर में ताला लगाकर कहीं गये तो कोई भी मेटाडोर लेकर आयेगा पूरे घर के सामान पार कर लेगा। अगर नई नवेली घर आई है और दहेज में पैसे कम लाई है तो उसको पूरे घर के लोग घेर लेंगे तथा उसकी ऐसी धुनाई करेंगे कि वह इस जन्म को कोसने लगेगी फिर या तो खुद जलकर मर जायेगी या मार दी जायेगी अथवा मारकर फांसी पर लटका दी जायेगी।...और तो और यहां कुछ क्षेत्रों में सामाजिक व्यवस्था और रिश्तो ं का भी खून होने लगा है। कभी ससुर अपनी बहू के साथ रेप कर बैठता है तो कभी भाभी के साथ देवर। इसके अलावा भी कई पकवान यहां रिश्तो को तार तार कर पक रहे हैं जिनमें बेटा अपने बाप का खून करके कहता है मुझे इसका कोई अफसोस नहीं, आपराधिक व्यंजनों में नक्सलियों को छोड़ दे तो यह इस अपराध के साथ न इंसाफी होगी। जंगलों से निकलकर होने वाले अपराधों में पुलिस वालों को उड़ा देना, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की खिचड़ी और अन्य इसी किस्म के मसालेदार किस्से रोज अखबार की सुर्खियां बनते हैं। इसका दायरा कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित है। अपराध जगत की इन सुर्खियों के बारे में सबको पता है लेकिन हमारी खाखी, वह सोई हुई है, उसमें एकता नहीं है। उसके साथी चंद लोगों के हाथों पिट जाते हैं लेकिन कोई उसकी मदद के लिये नहीं पहुंचता ।आपराधिक बाजार में शुक्रवार-शनिवार के दरमियान जो घटना राजधानी के रायपुर रेलवे स्टेशन में हुई वह खाखी को शर्मसार करती है। कई पुलिसवालों के सामने उनका साथी आटो वालों से पिटता रहा कोई उसे बचाने सामने नहीं आया। जब पुलिस का यह हाल है तो आम आदमी की अगर सड़क में पिटाई हो रही है, लुट रहा है या उसके साथ कोई अन्य वारदात कर रहा है तो यह पुलिस क्या करेगी? इसका एक नजारा अभी कुछ दिन पहले फ्रेंडशिप डे पर देखने को मिल चुका है जहां पुलिस के सामने रायपुर की बेटियां बेइज्जत कर दी गई। आपराधिक जगत के इन अदपके े और पके व्यंजनों ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि आम आदमी कहीं से भी सुरक्षित नहीं है। उसे अपनी रक्षा ठीक उसी प्रकार करनी होगी जैसा आजकल गोरेगांव में लुटरे के डर से लोग करने लगे हैं। दुकानों में मिर्ची पाउडर और हाकी स्टिक रख लोग जागरूक रहते हैं ताकि कभी कोई दुष्ट न आ जाये इस हथियार से वे मुकाबला करने बैठे हैं यह कहते हुए कि पुलिस निकम्मी हो गई। क्या ऐसी स्थिति पूरे छत्तीसगढ़ में नहीं बन चुकी?

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

उम्र कैद की सजा पर से संदेह खत्म! क्या फांसी की सजा पर भी सुको सज्ञान लेगी?

याकूब मेनन को फांसी  से पहले व बाद से यह बहस का विषय है कि फांसी दी जानी चाहिये या नहीं अभी भी इसपर बहस जारी है लेकिन इस बीच उम्र कैद का मामला भी सुर्खियों में है कि आखिर उम्र कैद होती है, तो कितने साल की? यह माना जाता रहा है कि उम्र कैद का मतलब है- चौदह साल जेल लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि उम्र कैद चौदह साल नहीं बल्कि ताउम्र है याने अपराधी की जब तक जिंदगी है तब तक उसे जेल में ही काटनी होगी. छत्तीसगढ के धीरज कुमार, शैलेन्द्र और तीन दोषियों के मामले में याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और वी गोपाला गोवड़ा की बेंच ने समाज के एक वर्ग द्वारा फांसी की सजा के विरूद्व अभियान पर टिप्पणी करते हुए कहा की यह वर्ग चाहता है कि फांसी को खत्म कर उसकी जगह आजीवन कारावास की सजा दी जाये तथा स्पष्ट किया कि उम्र कैद का मतलब उम्र कैद होता है न कि चौदह साल. अपराधी जिसे उम्र कैद हुई है उसे अपनी पूरी उम्र सलाखों के पीछे बितानी होगी. इससे यह तो संकेत मिलता है कि भविष्य में फांसी को खत्म करने पर भी विचार किया जा सकता है. सर्वोच्च अदालत ने अब तक उम्र कैद के संबन्ध में चली…

काले धूल के राक्षसों का उत्पात...क्यों खामोश है प्रशासन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के औद्योगिक क्षेत्रों-उरला, सिलतरा, सोनढोंगरी,भनपुरी से निकलने वाली काली रासायनिक धूल ने पूरे शहर को अपनी जकड़  में ले लिया है .यह धूल आस्ट्रेलिया के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाली धूल से 18 हजार गुना ज्यादा है.
यहां करीब तीन दर्जन उद्योग ऐसे हैं जो चौबीसों घंटे धूल भरी आंधी उगल रहे हैंं ,जिसपर किसी का कोई नियंत्रण नहीं ह्रै. नियंत्रण है तो भी वह कुछ दिनों में छूटकर आसमान और धरती दोनों पर कब्जा कर लेते हैं.
चौकाने वाली बात यह है कि वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है. यह संख्या चीन से ज्यादा है.प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण से जहां 1640 लोगों की मौत के मुकाबले चीन में वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या (1620 ) ज्यादा है. यह आंकड़े हम यहां इसलिये पेश कर रहे हैं ताकि रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये इसपर नियंत्रण पाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये. वायूु प्रदूषण के बगैर स्मार्ट सिटी,डिजिटल सिटी बनाने का सपना पूरा हो पाना कठिन है. आज स्थिति यह है कि एक स्थान पर कालेधूल को हटाया जाता है तो शहर का दूसरा भाग कालिख पुतवा लेत…

ऊची दुकान फीके पकवान!

रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर 2010

ऊँची दुकान फीके पक वान!
कभी बच्चो को परोसे जाने वाला मध्यान्ह भोजन तो कभी होटल, रेस्टोरेंट से खरीदी गई खाने की सामग्री तो कभी किसी समारोह में वितरित होने वाले भोजन के जहरीले होने और उसको खाने से लोगों के बीमार पडऩे की बात आम हो गई हैं। अभी बीते सप्ताह शनिवार को नई राजधानी में सड़क निर्माण कंपनी के मेस का खाना खाकर कई मजदूर बीमार हो गये। कइयों की हालत गंभीर थी। मेस को हैदराबाद की बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी चला रही थी। सबसे पहला सवाल यह उठता है कि जब कोई कंपनी या समारोह में इतने व्यक्तियों का खाना एक साथ पकता है उसे लोगों में बांटने के पहले जांच क्यों नहीं होती? खाना बनाने से पहले यह क्यों नहीं देखा जाता कि जहां खाना बनाया जा रहा है वहां का वातावरण पूर्ण साफ सुथरा है या नहीं। स्कूलों में बच्चों को वितरित होने वाले मध्यान्ह भोजन में भी कुछ इसी तरह का होता आ रहा है। बच्चो को जो खाना बनाने के लिये कच्चा माल पहुँचता है उसका उपयोग करने से पहले उसकी सही जांच पड़ताल नहीं होती फलत: उसमें कीड़े मकोड़े व अन्य जीव जन्तु भी मिल जाते हैं। अक्सर समारोह व शादी …