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ब्रांडेड दवाओं से तेरह गुना तक सस्ती दवा के खिलाफ कौन सी साजिश?

ब्रांडेड दवाओं से तेरह गुना तक सस्ती दवा के खिलाफ कौन सी साजिश?

जैनरिक दवाओं के मामले में भारत की गिनती दुनिया के बेहतरीन देशों में होती है. इस समय भारत  दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा जैनरिक दवाओं  के उत्पादक  वाला देश है किन्तु कितने चिकित्सक ऐसे हैं जो अपनी पर्ची में जैविक दवा लिखते है ? भारत से हर वर्ष करीब बयालीस हजार करोड़ रुपए की जैनरिक दवाएं बाहर दूसरे देशों में जाती है.यूनिसेफ अपनी जरूरत की पचास फीसदी जैनरिक दवाइयां भारत से ही मंगाता है. भारत से कई अफ्रीकी देशों में सस्ती जैनरिक दवाइयां भेजी जाती है तथा आ भी  रही है. इससे यह बात तो साफ है कि भारत में आम जनता के लिए सस्ती जैनरिक दवाइयां आसानी से बनाई व बेची जा सकती हैं किन्तु ऐसा सही ढंग से हो नहीं रहा.जैनरिक दवाओं  पार आम लोगों का विश्वास बढ़ाने और जैविक दवा के इस्तेमाल के लिये प्रेरित करने के लिये यह जरूरी है कि शासन स्तर पर चलाये जाने वाले अस्पताल ये दवाएं अपने मरीजों को मुफ्त में दें तथा प्रायवेट चिकित्सक अपनी पर्ची में कुछ नहीं तो कम से कम एक दवा जरूर लिखे और मरीज के परिवार को भी समझाये कि इससे क्या फायदे हैँ. बहुत से लोगों क…
हाल की पोस्ट

क्यों बन गये हैं भारत के लिए रोहिग्या सिरदर्द?

एक सरदर्द हमारे ऊपर उस इंटेलिजेंस रिपोर्ट के बाद और बढ़ गया जिसमें कहा गया है कि भारत-म्यांमार बॉर्डर पर कड़ी सुरक्षा के बीच रोहिंग्या मुसलमान पेशेवर तस्करों की मदद से समुद्र के रास्ते देश में घुसपैठ कर सकते हैं. रोहिंग्या मुसलमान स्थानीय एजेंसियों द्वारा उत्पीडऩ और स्थानीय बौद्ध आबादी के साथ उनके विवाद के बाद 2012 से म्यांमार भाग रहे हैं.यहां तक तो ठीक है किन्तु आतंकवादी संगठन इसका फायदा उठाने की कोशिश में लगे हैं. बंगलादेश  शरणार्थियों को झेल चुके भारत के लिये और शरणार्थियों को झेल पाना कठिन ही नहीं सभव भी नहीं है. यूं ही आबादी का बोझ हमारी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है वहीं आंतकवादी गतिविधियों को हम न केवल सीमा पर झेल रहे हैं बल्कि यह हमारी एक आंतरिक समस्या भी बनी हुई है.आज की स्थिति यह है कि 40 हजार रोहिंग्या असम, वेस्ट बंगाल, जम्मू, यूपी और दिल्ली के कैंप में रह रहे हैं.जबकि रोहिंग्या बंगाल जैसे क्षेत्रों से घुसपैठ करने की हर संभव कोशिश में लगे हैें. इसमें यह पहचानना कठिन है कि कौन सही शरणार्थी है और कौन आंतक के खेमे से आकर शामिल हुआ है अत: हमें क्या किसी भी दूसरे देश को भी…

रफतार की नई तकनालाजी...लो आ गई बुलेट ट्रेन!

रफतार की नई तकनालाजी...लो आ गई बुलेट ट्रेन! भारत में इस गुरूवार को जापान और भारत के बीच रफतार की एक नई तकनालाजी का उदय हुआ है. इसमें दो मत नहीं कि जब भी हमारे देश में कुछ इस तरह की तकनालाजी या संस्कृति कदम रखती है तो उसका पहले विरोध होता है जैसा पहले टीवी, कम्पयूटर का हुआ. हाल ही ड्रायवर लेस कार ने ऐसे विरोध को हवा दी. परिवहन मंत्री ने तो यह तक कह दिया कि हम इस कार को भारत की धरती पर कदम रखने नहीं देंगे. इसी कड़ी में अब तेज रफतार से दौडऩे वाली बुलेट ट्रेन भी कई लोगों को रास नहीं आ रही है. इसके पीछे छिपे कुछ कारण भी है जिसपर गौर करने की जरूरत है. भारतीय रेल दुनिया की सबसे बड़ी रेल सेवा होने के बावजूद सुविधाओं, सुरक्षा और किराये के मामले में सदैव आलोचना का शिकार रही है. ऐसे में हाल के कुछ दिनों में आम जनता को लेकर जाने वाली ट्रेनों का बेपटरी होना भी इस नई आधुनिकता को निशाने पर ले रहा है. अहमदाबाद और मुम्बई के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन का फायदा आम जनता को कितना मिलेगा यह अपने आप में प्रश्र है वहीं इसपर खर्च होने वाली राशि पर लगने वाला ब्याज भी किसी को रास नहीं आ रहा है. हम अपने देश में ब…

न्याय में देर है अंधेर नहीं...देरी अब चुभने लगी है!

घिनौने और क्रूर अपराधों से हमारा इतिहास भरा पड़ा है. इसमें दो मत नहीं कि देश के कानून ने क्रूरतम अपराधों में लिप्त लोगों को बख्शा भी नहीं किन्तु न्याय प्राप्ति में देर अब भी एक समस्या बनी हुई है इसके पीछे मौजूद कारण बताने की जरूरत नहीं. न्यायधीशों की कमी और ज्यादा मामले इसके पीछे एक कारण रहा है. अब धीरे धीरे इस समस्या का समाधान जरूर हो रहा है किन्तु अभी भी अपराध की गति में कोई कमी न आना चिंता का विषय है शायद इसके पीछे एक कारण यह भी है कि हमारा कानून अन्य देशों की बनस्बत कुछ रहम दिल है इसका फायदा उठाकर अपराधी जघन्य अपराध करने से भी नहीं चूकते. बीते वर्षो में कुछेक ऐसे मामले हुए जो मानवता को शर्र्मसार करने वाली थी जिसमें से अधिकांश में आरोपियों को सख्त से सख्त सजा भी मिली. कुछ को तो फांसी पर भी लटकाया गया लेकिन इसके बाद भी अपराधों का ग्राफ कम न होना चिंता का विषय है. इंडियन नेवी के अधिकारी के दो बच्चों गीता चोपड़ा साढ़े16 वर्ष और संजय चोपड़ा 14 वर्ष का 28 अगस्त 1978 को अपहरण और बलात्कार के बाद हत्या हुई- दो अपराधी बिल्ला और रंगा पकड़े गये मुकदमा चला तथा करीब चार साल बाद 31 जनवरी 1982 को…

अब जुड़ेंगी नदियां एक दूसरे से,देर हुई मगर लाभ होगा!

भारत की सारी बड़ी नदियों को आपस में जोडऩे का प्रस्ताव पहली बार इंजीनियर सर आर्थर कॉटन ने 1858 में दिया था.  कॉटन इससे पहले कावेरी, कृष्णा और गोदावरी पर कई डैम और प्रोजेक्ट बना चुके थे लेकिन तब के संसाधनों के बूते से बाहर होने के चलते यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी.1970 में तब इरिगेशन मिनिस्टर रहे केएल राव ने फिंर देश की नदियों को एक दूसरे से जोडऩे का प्रस्ताव दिया - वे चाहते थे कि एक नेशनल वॉटर ग्रिड बने ताकि गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों में जहां ज्यादा पानी रहता है वह  मध्य और दक्षिण भारत के इलाकों में पानी की कमी को पूरा करें. अगर उस समय से यह योजना क्रियान्वित कर दी जाती तो आज देश की खुशहाली इतनी बढ जाती कि देश देखता रह जाता. एक अंदाज लगाइये उस समय से लेकर अब तक देश के उपयोग में लाया जा सकने वाला कितना पानी अब तक बह गया होगा.बहरहाल राव चाहते थे कि उत्तर भारत का अतिरिक्त पानी मध्य और दक्षिण भारत तक पहुंचाया जाए केंद्रीय जल आयोग ने उनकी इस योजना को तकनीकी रूप से अव्यावहारिक बताते हुए खारिज कर दिया.इसके बाद नदी जोड़ परियोजना की चर्चा 1980 में हुई. एचआरडी मिनिस्ट्री ने एक रिपोर्ट तैयार …

पेट्रोल,डीजल की कीमतों में कमी ही हमारी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लायेगी

यू.एस. सहित कुछ देशों में इन्वैंट्री बढऩे और वल्र्ड मार्के ट में सप्लाई बढऩे से 1 महीने में क्रूड 10 प्रतिशत से ज्यादा सस्ता हुआ है इस सप्ताह गुरूवार को क्रूड 49 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया जो पिछले 4 हफ्तों का लो लैवल है, दूसरी ओर इराक ने साफ  कर दिया है कि वह आगे क्रूड प्रोडक्शन बढ़ाने जा रहा है इससे भी कच्चा तेल सस्ता होने से 1 मई को होने वाली तेल मार्कीटिंग कम्पनियों की पाक्षिक समीक्षा के दौरान पैट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम कम होने  की संभावना व्यक्त की जा रही है. कुछ और ओपेक देशों के भी ईराक की राह पर चलने से इंकार नहीं किया जा सकता. फिलहाल जो स्थिति बनी है वल्र्ड मार्केट में क्रूड सस्ता होने का फायदा इंडियन कंज्यूमर्स को मिलेगा. आगे क्रू्रड और सस्ता होता है तो सरकार पैट्रोल-डीजल की कीमतों को और कम कर सकती है यह जनता की सरकार से उम्मीद भी है.हमारे देश  में शुरू से अर्थव्यवस्था एक तरह से तेल के भावों पर ही निर्भर रहता है. तेल के भाव बढऩे के साथ साथ वस्तुओं के भावों में भी वृद्वि होना शुरू हो जाती है इसमें कुछ वजह तो लोग कृत्रिम रूप  से भी बना लेते हैं जिसका बहाना भी पेट्रोल डीज…

फिर खिसके प्रभु पटरी से....क्यों ढीली है प्रभू की पटरी?

देश में बीते 5 साल में 586 रेल हादसे हुए. इनमें से 53प्रतिशत एक्सीडेंट्स ट्रेन के पटरी से उतरने के चलते हुए शनिवार शाम यूपी के खतौली स्टेशन के पास उत्कल एक्सप्रेस के 12 डिब्बे पटरी से उतरने के चलते 23 लोगों की मौत हो गई और 156 जख्मी हो गए।.रेलवे की इस भीषणतम ट्रेन दुर्घटना की खबर ने दुनिया को चौका दिया तो वहीं जिन परिवारों के साथ बीती उनके होश उड़ गये.घरों से निकलती चीख पुकार और रोने की आवाज ने सबको दहला दिया.यह वही यूपी है जहां पिछले सालों में कई बार रेल दुर्घटनाएं हो चुकी है तथा कई लोग मारे गये हैं. इस बार भी वैसा ही हुआ-पुरी हरिद्वार उत्कल एक्स्सप्रेस  दुर्घटना के समय बताया जा रहा है कि ट्रेन 115 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफतार से दौड़ रही थी-इसी से अंदाज लगाया जा सकता है कि पटरी से उतरने के बाद क्या हुआ होगा. हम तो कल्पना कर सकते हैं लेकिन जिन लोगों ने भी इस नजारे को देखा वह दहल गया. कुछ ही मिनटों में यह खबर सारे चैनलों में वायरल हो गई. चैनलों के संवाददाता और उनके कैमरे घटनास्थल पर पहुंच गये. हमें उनकी सक्रियता की दाद देनी चाहिये लेकिन रेलवे का सुरक्षा तंत्र और उसके अधिकारियों को घटन…